बजट 2026-27 कल 1 फ़रवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किया। इस बार बजट में कई विभाग, योजनाओं के लिए बजट आवंटित हुए। इसमें से विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G) अधिनियम, 2025 के तहत नई ग्रामीण रोजगार योजना के लिए 95,692.31 करोड़ रुपए और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREG) के लिए 30,000 करोड़ आवंटित किए गए हैं। लेकिन इस बजट राशि पर NAREGA (नरेगा) संघ मोर्चा ने अपना बयान जारी करते हुए इसको श्रमिक विरोधी बताया और कहा कि यह राशि पर्याप्त नहीं क्योंकि इस राशि का आधा हिस्सा पिछले बकाया के निपटारे में खत्म हो जायेगा।
केंद्र सरकार नए बिल के ज़रिये महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलकर विकसित भारत- रोज़गार और आजीविका की गारंटी मिशन (ग्रामीण) नाम कर दिया। इस बदलाव के तहत बीजेपी सरकार के ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य से जोड़कर नया नाम दिया गया।
VB-G RAM G पर मिले बजट पर्याप्त नहीं – नरेगा संघ मोर्चा
इस बार के बजट में VB-G RAM G के लिए 95,692.31 करोड़ रुपए और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREG) के लिए 30,000 करोड़ आवंटित किए गए हैं। इसका मतलब दोनों ग्रामीण रोजगार योजनाओं के लिए कुल आवंटन 1,25,692.31 करोड़ है, जबकि 2025-26 में मनरेगा के लिए संशोधित अनुमान 88,000 करोड़ है। हालांकि, कार्यकर्ताओं के अनुसार, यह आवंटन मनरेगा के तहत पंजीकृत सभी श्रमिकों को 125 कार्यदिवस उपलब्ध कराने के सरकार के लक्ष्य को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
आपको बता दें कि VB-G RAM G अभी लागू नहीं किया गया है।
नरेगा संघ मोर्चा द्वारा जारी बयान


बजट श्रमिक विरोधी – नरेगा संघ मोर्चा
नरेगा संघर्ष मोर्चा ने जारी बयान में कहा है कि वित्तीय वर्ष 2026–27 के बजट में प्रस्तावित वीबी-ग्रामगजी (VB-GRAMG) योजना को अपारदर्शी और श्रमिक-विरोधी है। बजट भाषण और दस्तावेज़ों में न तो नरेगा का उल्लेख है और न ही वीबी-ग्रामग को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी दी गई है कि यह राशि किस तरह से खर्च की जाएगी। बजट में 125 दिन के रोजगार के वादे के लिए जो राशि रखी गई है, वह वास्तविक जरूरत का केवल 42% है। सक्रिय परिवारों के लिए भी 125 दिन का काम देने हेतु लगभग 3.84 लाख करोड़ रुपये (जिसमें केंद्र का हिस्सा 2.3 लाख करोड़) चाहिए, जबकि वास्तविक आवंटन सिर्फ 95,692 करोड़ रुपये है। इस राशि से औसतन केवल 52 दिन का रोजगार ही संभव है, बाकी बोझ राज्यों पर डाल दिया गया है।
मनरेगा बजट का आधा हिस्सा पिछला बकाया के निपटारे के लिए
इस बजट में मनरेगा के लिए 2026–27 में 30,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जिसमें से बड़ा हिस्सा पिछली बकाया देनदारियों को चुकाने में ही खत्म हो जाएगा। इससे गर्मियों के अहम महीनों में रोजगार उपलब्ध कराना लगभग असंभव हो जाएगा।
नरेगा संघ मोर्चा की मांग
नरेगा संघ मोर्चा संगठन ने सरकार द्वारा जारी की गई बजट राशि को श्रमिकों की उपेक्षा और वीबी-ग्रामगजी को एक “ढोंग” बताया है। नरेगा संघर्ष मोर्चा ने वीबी-ग्रामगजी (VB-GRAMG) को पूरी तरह रद्द कर नरेगा को बहाल करने की मांग दोहराई है।
मनरेगा का नाम चाहे बदल दिया गया हो या फिर इसके लिए बजट दिया गया हो लेकिन सवाल आज भी वही है कि क्या सच में जमीनी स्तर पर लोगों को काम मिलेगा और क्या उन्हें उनके काम का पैसा समय पर मिलेगा? जमीनी स्तर पर ये सामने आया है कि मनरेगा में काम करने वाले मजदूरों को समय पर न काम मिल पाता था और न ही मजदूरी, तो इस बार नाम बदलने से कितना बदलाव आएगा?
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