एक बार सरकार जब लोगों की सुविधा के लिए इंतजाम कर देती है उसके बाद देखने नहीं आती। कुछ टूट फुट जाने पर चाहे वह सड़क हो या फिर पानी की टंकी या फिर पानी का फटा पाइप।
रिपोर्ट – सुमन दिवाकर, लेखन – सुचित्रा
पटना जिले के मसौढ़ी प्रखंड अंतर्गत सिकंदरपुर गांव में सरकारी योजनाओं की पोल खुलती नजर आ रही है। यहां पिछले करीब छह महीनों से पानी की टंकी फटी हुई है। हर “घर नल-जल” और “जल है तो कल है” जैसे नारों के बीच जमीनी सच्चाई कुछ और ही है। सरकार के तरफ पानी बचाओ को लेकर जागरूक करती है वहीं दूसरी तरफ बहते पानी को रोकने की की बजाय समस्या को नज़रअंदाज करती है।
गांव में सुविधा के लिए रखी गई पानी की टंकी मोटर चालू होते ही भरने के बजाय पानी जमीन में बह जाता है। सड़कों पर पानी जमा रहता है, कीचड़ फैलता है लेकिन लोगों के घरों तक नाम मात्र का पानी ही पहुंच पाता है। गांव के लोग पानी की बर्बादी और किल्लत—दोनों से जूझ रहे हैं।
आधा गांव प्यासा, पूरा गांव परेशान
ग्रामीण अवधेश कुमार बताते हैं कि सिकंदरपुर वार्ड नंबर 2 में करीब 45–50 घरों में नल-जल योजना के तहत कनेक्शन दिया गया है और आबादी लगभग 250 से 300 के बीच है। शुरुआत में व्यवस्था ठीक थी और कम समय में पूरे गांव को पानी मिल जाता था लेकिन टंकी फटने के बाद हालात बिगड़ गए। अब दो-दो, तीन-तीन घंटे मोटर चलाने पर भी टंकी नहीं भरती। पानी जमीन में बह जाता है और गांव तक अधूरा पानी पहुंचता है।
ये समस्या किसी एक इलाके की नहीं है बल्कि अधिकतर जगह यही हाल है। खबर लहरिया की रिपोर्ट में यूपी के महोबा जिले के गांव में पाइप लाइन फटने पर पानी बर्बाद हो रहा है।
पानी और कीचड़ की समस्या
दख्खन मांझी बताते हैं कि टंकी से आगे कच्ची सड़क के किनारे मांझी समाज के करीब 15–20 घर हैं। सभी के पास कनेक्शन है लेकिन टंकी के नीचे से लगातार गिरते पानी की वजह से मिट्टी गीली रहती है, सड़क पर पानी भर जाता है और आवागमन मुश्किल हो जाता है। पहले एक व्यक्ति मोटर चलाता था, अब मजबूरी में कोई भी आकर मोटर चालू कर देता है। समस्या की जानकारी वार्ड मेंबर को दी गई लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
“पानी भरा हो तो बिजली न भी रहे, काम चल जाए”
गांव के निवासी नंद बाबू सिंह कहते हैं कि टंकी फूटे हुए छह महीने हो चुके हैं। अगर टंकी ठीक होती तो बिजली कटने पर भी पानी जमा रहता और लोगों को राहत मिलती लेकिन यहां बिजली कटते ही पानी भी बंद हो जाता है। गांव वाले यह तक नहीं जानते कि शिकायत कहां करें। मुखिया और वार्ड मेंबर के अलावा उन्हें कोई रास्ता नजर नहीं आता।
महिलाओं की परेशानी
ग्रामीण महिला सुष्मिता बताती हैं कि पानी के बिना घर का हर काम ठप हो जाता है. नहाना, कपड़े धोना, खाना बनाना, पशुओं की देखभाल और घर के छोटे-बड़े पौधों को पानी देना। गांव में जब जरूरत होती है, तब पानी कहीं नहीं मिलता। पानी घरों तक पहुंचने के बजाय सड़कों पर बहता रहता है। “पानी है, पानी है” कहते रहते हैं लेकिन जरूरत के समय पानी नदारद रहता है।
आगे सुष्मिता कहती हैं कि घर में थोड़ी-बहुत सब्जी जैसे धनिया और मिर्च उगाई गई है लेकिन पानी के अभाव में उसकी सिंचाई भी नहीं हो पाती।
वे आगे कहती हैं कि ठंड के मौसम में परेशानी और बढ़ जाती है। अगर टंकी भरी हो और पानी चलता रहे तो लोग गर्म पानी से नहा सकते हैं लेकिन जब पानी जमा ही नहीं होता तो रखा हुआ पानी ठंडा हो जाता है। उसी से काम करना पड़ता है, जिससे बीमार पड़ने का डर बना रहता है।
शिकायत के बाद भी समाधान नहीं
बनवारी सिंह के अनुसार, वार्ड मेंबर को कई बार शिकायत दी गई लेकिन हर बार यही जवाब मिला कि “हम क्या कर सकते हैं।” ग्रामीणों का कहना है कि अगर एक महीने के भीतर समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे मजबूरन मसौढ़ी प्रखंड कार्यालय में धरना देंगे।
विभाग समस्या से अंजान
मसौढ़ी कार्यालय के जेई सुशील कुमार ने फोन पर बताया कि उन्हें इस समस्या की जानकारी नहीं थी। उनका कहना है कि अगर शिकायत मिलती है तो वे वार्ड मेंबर से बात कर समस्या का आकलन करेंगे। छोटी खराबी होने पर एक-दो दिन में और बड़ी समस्या होने पर समय लग सकता है।
विभाग से बात करने पर भी इन ग्रमीणों की समस्या हल होती नहीं दिखाई दिया। उनके क्षेत्र में कोई काम सही से हो भी रहा है कि नहीं इस बात की जानकारी के लिए उन्हें खुद देखकर आना चाहिए। इतने समय से पानी की इतनी बर्बादी हो रही है और विभाग को इसकी कोई भनक तक नहीं। इस तरह की प्रतिक्रिया विभाग की लापरवाही को दिखाती है।
ग्रामीणों में इस बात को लेकर गुस्सा है कि जहां सरकार “हर घर नल-जल”, “हर घर बिजली” और “जल बचाओ” जैसे अभियान चला रही है। वहीं उनके गांव में पानी की एक बुनियादी समस्या तक हल नहीं हो पा रही। लोगों का कहना है कि सरकारें जनता से बनती हैं लेकिन सुविधाओं से वही जनता वंचित रह जाती है। “पानी बचाओ, जीवन बचाओ” का नारा तब ही सफल होगा जब बहते पानी की बर्बादी रुके और जरूरतमंदों तक पानी पहुंचे। फिलहाल गांव वाले इसी उम्मीद में हैं कि उनकी आवाज सुनी जाएगी और छह महीने से बह रहा पानी आखिरकार किसी काम आएगा।
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