भारत में हो रहे अलग-अलग क्षेत्रों में ईसाईयों पर बढ़ते हमले पर कल मंगलवार 3 फरवरी को चर्चा हुई। इस चर्चा में कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (सीबीसीआई) के अध्यक्ष आर्कबिशप एंड्रयूज थाज़थ (Archbishop Andrews Thazhath) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से देश में ईसाइयों पर हुए हमलों की निंदा करने को कहा। यह बात आर्कबिशप एंड्रयूज थाज़थ ने बेंगलुरु में सीबीसीआई की 37वीं आम सभा की बैठक से पहले की।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में यह बात चर्चा का विषय इसलिए बनी क्योंकि हाल ही में ओडिशा में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं द्वारा कथित तौर पर एक पादरी, बिपिन बिहारी नायक पर हमला किया गया था जिसमें उन्हें गाय का गोबर खाने और जय श्री राम का जाप करने के लिए मजबूर किया गया था। इसी तरह अगस्त 2025 में, केरल स्थित कैथोलिक ननों और पादरियों पर ओडिशा में बजरंग दल के सदस्यों द्वारा कथित तौर पर हमला किया गया था। ऐसे कई अन्य मामले आए दिन ख़बरों में आते रहते हैं उन पर चिंता जताते हुए कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (सीबीसीआई) के अध्यक्ष आर्कबिशप एंड्रयूज थाज़थ ने बैठक में प्रधानमंत्री को इन मुद्दों को उठाने का अनुरोध किया है।
देश में अल्पसंख्यकों और ईसाइयों के अधिकारों की रक्षा करना सरकार का कर्तव्य
बैठक में कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (सीबीसीआई) के अध्यक्ष आर्कबिशप एंड्रयूज थाज़थ ने कहा कि “हम हमले के हर मौके पर सरकारी अधिकारियों से संपर्क करते हैं। हम जवाबी हमला नहीं करते। हमने प्रधानमंत्री से व्यक्तिगत रूप से इस मुद्दे को उठाया है। हाल ही में, जब वे क्रिसमस समारोह में हमारे साथ शामिल हुए थे, तब हमने उनसे बात की थी। अल्पसंख्यकों और ईसाइयों के अधिकारों की रक्षा करना सरकार का कर्तव्य है। जब भी हम अधिकारियों के पास जाते हैं, वे कहते हैं कि हमलावर कुछ कट्टरपंथी समूह हैं। लेकिन इन कट्टरपंथी समूहों पर लगाम लगाइए।”
आगे उन्होंने कहा “कुछ राजनीतिक दल इसे राजनीतिक तरीके से कर सकते हैं। हम राजनीतिक लोग नहीं हैं। धर्म के आधार पर ईसाइयों पर हमले हुए हैं। हम इससे भयभीत हैं। हम चाहते हैं कि प्रधानमंत्री आवश्यक एहतियात बरतें और ऐसे कृत्यों की निंदा करें। हम ईसाइयों ने राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया है और आगे भी देते रहेंगे। लेकिन कभी-कभी धार्मिक भेदभाव और धर्म के आधार पर ईसाइयों पर हमले होते हैं। हमें इससे डर लगता है।”
37वीं CBCI जनरल बॉडी मीटिंग
37वीं CBCI जनरल बॉडी मीटिंग कैथोलिक चर्च से जुड़ा एक अहम सम्मेलन है। यह बैठक बेंगलुरु में आज 4 फरवरी से लेकर 10 फरवरी तक होगी। भारत में कैथोलिक बिशपों के संगठन CBCI (कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया) द्वारा बुलाई जाती है, ताकि देश भर के बिशप (चर्च के ऊँचे पद पर होते हैं) एक साथ बैठकर चर्च और समाज से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर सकें।
CBCI Press Meet | Archbishop Anil Joseph Thomas Couto on Faith, Constitution & Nation | SG News
In this exclusive CBCI Press Meet Archbishop Anil Joseph Thomas Couto, shares key details about the preparations, arrangements, and significance of the 37th Catholic Bishops’… pic.twitter.com/i1uQ5h34eZ
— SG News (@SGNews123) February 3, 2026
इस बैठक का उद्देश्य क्या है?
- भारत में ईसाइयों और चर्चों से जुड़े हालात पर विचार करना
- सामाजिक, शैक्षणिक और धार्मिक चुनौतियों पर चर्चा
- अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, आपसी भाईचारा और शांति को बढ़ावा देना
- चर्च की भविष्य की नीतियों और दिशा तय करना
आज की बैठक में खास
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार सीबीसीआई की आम सभा की बैठक बुधवार आज 4 फरवरी को “आस्था और राष्ट्र: भारत के संवैधानिक दृष्टिकोण के प्रति चर्च की गवाही” विषय पर शुरू होगी। सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति के.एम. जोसेफ और प्रोफेसर डी. डोमिनिक “वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक संदर्भ और संवैधानिक मूल्य” विषय पर बोलेंगे।
ईसाईयों पर घृणास्पद भाषण को लेकर रिपोर्ट
सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ ऑर्गेनाइज्ड हेट (CSOH) की परियोजना इंडिया हेट लैब (IHL) की वार्षिक रिपोर्ट में देशभर में घृणास्पद भाषण की चिंताजनक तस्वीर सामने आई हैं। ईसाइयों के खिलाफ 162 घृणास्पद भाषण दर्ज किए गए जो कुल घटनाओं का 12 प्रतिशत है। इनमें से 29 मामलों में सीधे ईसाइयों को निशाना बनाया गया। रिपोर्ट के अनुसार ईसाई विरोधी भाषणों में 2024 की तुलना में 41 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है जो धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए बढ़ते खतरे की ओर इशारा करती है।
साल 2025 में छत्तीसगढ़ सहित देश के कई हिस्सों में कथित धर्मांतरण के आरोपों के तहत ईसाई समुदाय पर हिंसा, सामाजिक बहिष्कार और कानूनी उत्पीड़न की घटनाएँ चिंताजनक रूप से बढ़ी हैं।
चर्चों और प्रार्थना सभाओं पर हमले, महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार, ईसाई परिवारों को गांवों से बेदख़ल करना और मृतकों के अंतिम संस्कार तक को रोकना इस संकट की भयावह तस्वीर पेश करता है। कई मामलों में पुलिस और प्रशासन की निष्क्रियता या पक्षपातपूर्ण भूमिका भी सामने आयी है जबकि धर्मांतरण विरोधी जैसे कानूनों का इस्तेमाल अक्सर पीड़ितों के ख़िलाफ़ होते देखा गया।
देश में धर्म को लेकर राजनीति बढ़ती जा रही है। जहां एक तरफ कथित तौर बीजेपी पार्टी को हिन्दू राष्ट्र बनाने पर जोर देने का जिम्मेदार बताया जाता है वहीं हिन्दू राष्ट्र बनाने के लिए बजरंग दल के लोग भी अलग राज्यों में मुस्लिम और ईसाईयों के खिलाफ बयानबाजी और रोकटोक करते नज़र आते हैं। इस तरह के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी होते हैं। भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है लेकिन आज के समय में यह देश धर्म और राजनीति की भेंट चढ़ता दिखाई देता है।
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