खबर लहरिया Blog Assam Polygamy News: असम में बहुविवाह पर पूरी तरह रोक, पहली शादी छुपाकर दूसरी शादी करने पर 10 साल की जेल 

Assam Polygamy News: असम में बहुविवाह पर पूरी तरह रोक, पहली शादी छुपाकर दूसरी शादी करने पर 10 साल की जेल 

नए कानून का एक बड़ा उद्देश्य उन महिलाओं की मदद करना है जो अवैध बहुविवाह का सामना करती हैं। विधेयक में साफ कहा गया है कि ऐसी महिलाओं जो इस परेशानियों का सामना करती हैं उन्हें मुआवजा, कानूनी सहायता और जरूरत के मुताबिक सहयोग दिया जाएगा ताकि उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति सुरक्षित रहे।

Assam CM Himanta Biswa

असम सीएम हिमंत बिस्वा (फोटो साभार: पीटीआई)

असम विधानसभा ने एक बड़ा फैसला लेते हुए असम बहुविवाह निषेध विधेयक 2025 को मंजूरी दे दी। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा लाया गया यह प्रस्ताव राज्य में बहुविवाह पर पूरी तरह रोक लगाने की दिशा में अब तक का सबसे अहम कदम माना जा रहा है। मतदान में बिल को भारी समर्थन मिला और इसके बाद असम भी उन राज्यों की सूची में शामिल हो गया जहां बहुविवाह को पूरी तरह अवैध बनाने के लिए सख्त नियम लागू किए गए हैं।

सदन में दिए गए दस्तावेज बताते हैं कि इस कानून का मकसद राज्य में बहुविवाह की प्रथा को खत्म करना और महिलाओं को मानसिक, सामाजिक और आर्थिक शोषण से सुरक्षा देना है। बिल में साफ लिखा है कि अगर कोई व्यक्ति अपनी पहली शादी के कानूनी रूप से जारी होने के बावजूद दूसरी शादी करता है तो यह सीधे अपराध माना जाएगा। ऐसे मामलों में आरोपी को सात साल तक की जेल और जुर्माना देने का प्रावधान है। 

क्या होगी इसकी सजा? 

पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार बिल में सबसे सख्त सजा उन लोगों के लिए रखी गई है जो अपनी पहली शादी छुपाकर दूसरी शादी करते हैं। ऐसे मामलों में आरोपी को दस साल के लिए जेल भेजने और भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान है। कानून में यह भी कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति यह गलती बार-बार करता है तो हर बार उसकी सजा पहले की तुलना में दोगुनी कर दी जाएगी ताकि दोबारा अपराध करने की संभावना कम हो सके। इसी के साथ बहुविवाह को बढ़ावा देने वाले या इसे छिपाने में सहयोग करने वालों के खिलाफ भी कार्यवाही की जाएगी। ऐसे मामलों में दो साल तक की कैद के साथ एक लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसी में यदि कोई व्यक्ति जानते हुए भी अवैध शादी करता है तो उसके खिलाफ भी कार्यवाही की जाएगी और डेढ़ लाख तक का जुर्माना और दो साल तक की कैद का सामना करना पड़ेगा। 

बहुविवाह है क्या? 

इस कानून में अनुसूचित जनजातियों और संविधान की छठी अनुसूची वाले क्षेत्रों को शामिल नहीं किया गया है। इस कानून का नियम अनुसूचित जनजातियों और छठी अनुसूची वाले क्षेत्रों पर लागू नहीं होता क्योंकि इन जगहों को पहले से ही अपने फैसले खुद लेने के लिए खास अधिकार मिले हुए हैं।

विधेयक में ‘बहुविवाह’ की परिभाषा भी साफ की गई है। इसके अनुसार अगर कोई व्यक्ति तब दूसरी शादी करता है जब उसकी पहली शादी अभी खत्म नहीं हुई है यानि जीवनसाथी जीवित है और न तलाक हुआ है न शादी शून्य घोषित हुई है तो यह बहुविवाह माना जाएगा।

महिलाओं को आर्थिक समानता का प्रावधान 

नए कानून का एक बड़ा उद्देश्य उन महिलाओं की मदद करना है जो अवैध बहुविवाह का सामना करती हैं। विधेयक में साफ कहा गया है कि ऐसी महिलाओं जो इस परेशानियों का सामना करती हैं उन्हें मुआवजा, कानूनी सहायता और जरूरत के मुताबिक सहयोग दिया जाएगा ताकि उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति सुरक्षित रहे। सरकार का तर्क है कि बहुविवाह की स्थिति में सबसे ज्यादा नुकसान महिलाओं को झेलना पड़ता है इसलिए यह कानून उनकी सुरक्षा और सम्मान को ध्यान में रखकर बनाया गया है। असम सरकार मानती है कि यह कदम न केवल महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करेगा बल्कि परिवारिक ढांचे को भी कानूनी रूप से सुरक्षित बनाएगा और समाज में सुधार लाने में मदद करेगा। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि उनकी सरकार 2026 के विधानसभा चुनाव में फिर से सत्ता में आती है तो राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू किया जाएगा। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि अपने पहले कार्यकाल में भी उन्होंने UCC लागू करने का वादा किया था। इसके साथ ही उन्होंने घोषणा की कि दोबारा मुख्यमंत्री बनने पर वे महिलाओं की शादी की न्यूनतम उम्र बढ़ाकर 21 साल कर देंगे ताकि उनके अधिकार और सुरक्षा और मजबूत हो सकें।

 

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