खबर लहरिया Blog Anganwadi News : आंगनबाड़ी केंद्र न होने से खुले में पढ़ रहे बच्चे

Anganwadi News : आंगनबाड़ी केंद्र न होने से खुले में पढ़ रहे बच्चे

सरकार, सरकारी बिल्डिंग में करोड़ो रूपये खर्च करती है लेकिन आम जनता के लिए चालू की गई सुविधा का ध्यान नहीं रखती। कहने को आंगनबाड़ी केंद्र सरकार ने बच्चों की शिक्षा और उनके पोषण के लिए खुलवाए हैं लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही है। प्रयागराज के शंकरगढ ब्लॉक के सेमरा खान गांव में छोटे बच्चों की शिक्षा के लिए आंगनबाड़ी तो 1990 से चल रहा है, लेकिन अभी तक आंगनबाड़ी केंद्र नहीं बना है।

घर के आँगन में पढ़ते हुए बच्चे (फोटो साभार : सुनीता)

35 साल हो गए नहीं बना आंगनबाड़ी केंद्र

सेमरा खान गांव की आंगनबाड़ी कार्यकर्ती श्यामकली‌ का कहना है “हम सन् नब्बे‌ (1990) में मेरा चयन हुआ था। मुझे मेरी नियुक्ति हुए पैंतीस साल हो चुके हैं अब रिटायरमेंट का समय आ गया। लेकिन इतने सालों में आज तक सरकार यहां पर एक भी आंगनबाड़ी केंद्र नहीं दे पाई है। आंगनबाड़ी केंद्र न होने के कारण हम बच्चों की देखभाल में ही लगे रहते हैं, किसी तरह की शिक्षा नहीं दे पाते हैं, चाहे वो किसी तरह के खेलकूद हो या शिक्षा की पहली पुस्तक। हमारे पास बच्चे पढ़ाने के लिए कोई स्थायी जगह नहीं है हम कहां बच्चे बैठाएं?”

आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ता बच्चों को पढ़ाते हुए (फोटो साभार : सुनीता)

बरसात में बच्चों को पढ़ाना मुश्किल

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्यामकली ने बताया कि जब बारिश होती है तो उस समय कहीं बैठने‌ की जगह नहीं रहती। कभी किसी के घर बैठकर बच्चों को पढ़ाना पड़ता है या तो फिर बरसात बंद होने का इंतजार करना पड़ता है। हमारे यहां कुल 40 बच्चे हैं। कब तक रोज-रोज जाकर के दूसरों के घरों में बैठकर बच्चों को पढ़ाएंगे। गांव ववाले भी कब तक हमारी मदद करेंगे?

आंगनबाड़ी केंद्र न होने से परिवार वाले चिंतित

माही जोकि 4 साल की है उनकी मम्मी‌ गुंजन का कहती हैं कि “हम लोग अपना बच्चा कहां भेजें जब आंगनबाड़ी केंद्र नहीं है। हमारे छोटे बच्चे हैं, कोई निर्धारित जगह नहीं आज यहां तो कल वहां। भला ऐसे केंद्र चलता है कोई? बच्चे क्या ही सीख पाएंगे। सभी बच्चों का भविष्य ख़राब गई जायेगा। आंगनबाड़ी बच्चों के लिए शिक्षा की पहली सीढ़ी होती है और वही अव्यवस्थित है तो बच्चे क्या ही करेंगे वहां जाकर।

वही अनमोल‌ के मम्मी आशा का कहना है इस उम्र में बच्चे बैठना, उठाना, बात करना सिखाते हैं आंगनबाड़ी केंद्र इसलिए ही होता है। बच्चे थोड़ी देर घर से बाहर रहते हैं वहां जाकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की निगरानी में रहेंगे वहां उनका और विकास होगा जैसे कैसे बात करते, कैसे खाना खाते हैं? लेकिन जब आंगनबाड़ी केंद्र ही नहीं बना तो बच्चे कैसे सीखेंगे?

पोषाहार देने में होती है दिक्कत

यही हाल पोषाहार वितरण का है। कभी पेड़ के नीचे कभी, किसी के घर में अगर आंगनबाड़ी केंद्र होता तो यह दिक्कत नहीं आते। जहां पोषाहार रखा जाता है वहां की बिल्डिंग भी जर्जर हालत में हैं वहां रखा अनाज सड़ जाता है या तो चूहे खा जाता हैं।

बाल विकास परियोजना अधिकारी कार्यालय (फोटो साभार: सुनीता)

बच्चों को टीका लगाने की भी जगह नहीं

मनीषा जो गर्भवती हैं उनका कहना है कि जब टीकाकरण होता है तब भी कोई जगह निर्धारित नहीं होती है किसी के घर में बैठ‌ कर लगाती है। यदि आंगनबाड़ी केंद्र होता तो अपना वही बैठ के लगवाते‌। जब गर्मी के समय होता है हम लोग दो किलो मीटर कपारी पैदल जाते हैं हालत खराब‌ हो जाती है।

खुले में बच्चे पढ़ने पर ध्यान नहीं दे पाते

आस्था की मम्मी आरती बताती हैं उनकी आस्था चार साल की है। केन्द्र न होने के कारण से कुछ नहीं सीख पायी। अब तो एक साल बाद प्राईमरी‌ में पढ़ने जाने लगेगी पर क ,ख,भी नहीं आता और न ए बी, सी, डी। यहां आंगनबाड़ी केन्द्र बना होता तो कुछ तो सीख ही जाती। कुछ तो सिखती घर से दूर रहने की आदत हो जाती, अब अचानक से स्कूल जाएगी तो परेशान करेगी।

बच्चों के लिए आया सामना रखने की जगह नहीं

आंगनबाड़ी सहायिका सुशीला कहती हैं मुझे तो और ज्यादा दिक्कत होती है। जब बच्चों को बुलाने जाते हैं बच्चों के अभिभावक बोलते हैं कहा बैठाओगे ले जाकर,कोई बैठाने की जगह नहीं है रोज यह सुनना पड़ता है। जो भी आंगनबाड़ी का समान है वो कहा रखें -जैसे बच्चो के खेलने के खिलौने कई बार गांव में किसी के घर रख देते हैं तो कई बार खेलौना‌ खो जाता है। बच्चों के बैठने की टाट‌ पट्टी ,चाट पेपर में सब रोज-रोज कहा रखें? बच्चों को तो खुले में पेड़ के नीचे बैठा लेते हैं लेकिन समान कहां रखें? हमेशा हर मिटिंग में यही हमारी मांग रही है आंगनबाड़ी केंद्र बनवाया जाए।

प्रधान सुभाष‌ का कहना है कि हमारे गांव के आबादी‌ लगभग‌ चार हजार है। तीन आंगनबाड़ी कार्यकर्ता नियुक्त हैं एक मिनी‌ आंगनबाड़ी है। अभी कोर्ट में मामला है जहां आंगनबाड़ी केंद्र नहीं है उसके लिए हम लिखित विभाग‌ में दिये है। अपने तरफ से तीनो आंगनबाड़ी के एक महिने पहले प्रस्ताव दे चुके हैं।

शंकरगढ़ सी‌ डी पी ओ सुरेन्द्र कुमार का कहना है कि हमारे यहां एक 158 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता नियुक्त हैं और 57 केंद्र बने है एक जर्जर है बाकी केन्द्र प्राईमरी स्कूल में खोले जा रहे हैं। जहाँ आंगनबाड़ी केंद्र नहीं बना है वहां के लिए जिला में अपने विभाग‌ को लिखित दिए हैं जमीन‌ के लिए प्रधान‌ को बोले हैं वो ग्राम पंचायत की जमीन दें,केन्द्र बनने के लिए कुछ गांव का बजट आने वाला है।

 

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