भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त ने 22 जनवरी 2026 को जनगणना 2027 के पहले चरण, यानी घर-घर सूचीकरण अभियान के लिए नई प्रश्नों की सूची जारी किया गया है। यह कदम अगले दस साल के जनसंख्या सर्वेक्षण की तैयारी में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पहला चरण 1 अप्रैल, 2026 से शुरू होगा और इसमें 33 बिंदुओं वाली प्रश्नावली का इस्तेमाल किया जाएगा। यह प्रश्नावली 2011 की जनगणना के बाद समाज में हुए बदलावों को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है।
बता दें भारत में पिछली जनगणना साल 2011 में कराई गई थी। इसके बाद 2021 में होने वाली जनगणना कोविड-19 महामारी के चलते टाल दी गई। अब सरकार ने साल 2027 में दोबारा जनगणना की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया है। यह पूरी प्रक्रिया जनगणना अधिनियम 1948 और जनगणना नियम 1990 के तहत की जाती है जो इसे कानूनी आधार देते हैं। जनगणना को देश का सबसे विश्वसनीय और व्यापक आंकड़ा संग्रह माना जाता है। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर सरकार अपनी बड़ी योजनाएं नीतियां और विकास कार्यक्रम तय करती है।
जनगणना 2027 का पूरा ढांचा
जनगणना 2027 को दो चरणों में आयोजित किया जाएगा। पहला चरण जिसे हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन (एचएलओ) कहा जाता है उसमें घरों की सूची बनाई जाएगी और घर की स्थिति तथा उपलब्ध सुविधाओं का विवरण लिया जाएगा। दूसरा चरण जनसंख्या गणना 1 फरवरी 2027 से शुरू होगा। इसमें हर घर में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति की विस्तृत जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक जानकारी दर्ज की जाएगी।
यह भारत की 16वीं जनगणना और स्वतंत्रता के बाद आठवीं जनगणना होगी जो देश भर में नीति बनाने और शासन के लिए महत्वपूर्ण आंकड़े प्रदान करेगी।
Notification of questionnaire of Phase I of Census of India 2027 – Houselisting & Housing Census has been issued. The questionnaire for Phase II i.e. Population Enumeration will be notified in due course.
भारत की जनगणना 2027 के प्रथम चरण – मकानसूचीकरण और मकानों की गणना हेतु… pic.twitter.com/1BHbxmA8fN
— Census India 2027 (@CensusIndia2027) January 22, 2026
वो 33 सवाल का लिस्ट –
- भवन संख्या (नगरपालिका/स्थानीय निकाय अथवा जनगणना संख्या)
- जनगणना गृह संख्या
- जनगणना गृह के फर्श की प्रमुख सामग्री
- जनगणना गृह की दीवार की प्रमुख सामग्री
- जनगणना गृह की छत की प्रमुख सामग्री
- जनगणना गृह का उपयोग
- जनगणना गृह की स्थिति
- परिवार संख्या
- परिवार में सामान्यतः निवास करने वाले व्यक्तियों की कुल संख्या
- परिवार के मुखिया का नाम
- परिवार के मुखिया का लिंग
- क्या परिवार का मुखिया अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य से संबंधित है
- जनगणना गृह का स्वामित्व स्वरूप
- परिवार के विशेष अधिकार में उपलब्ध आवासीय कमरों की संख्या
- परिवार में रहने वाले विवाहित दंपतियों की संख्या
- पीने के पानी का मुख्य स्रोत
- पीने के पानी के स्रोत की उपलब्धता
- प्रकाश व्यवस्था का मुख्य स्रोत
- शौचालय की उपलब्धता
- शौचालय का प्रकार
- अपशिष्ट जल निकासी व्यवस्था
- स्नान सुविधा की उपलब्धता
- रसोईघर तथा एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन की उपलब्धता
- खाना पकाने के लिए प्रयुक्त मुख्य ईंधन
- रेडियो/ट्रांजिस्टर
- टेलीविजन
- इंटरनेट की उपलब्धता
- लैपटॉप/कंप्यूटर
- टेलीफोन/मोबाइल फोन/स्मार्टफोन
- साइकिल/स्कूटर/मोटरसाइकिल/मोपेड
- कार/जीप/वैन
- परिवार में उपभोग किया जाने वाला मुख्य अनाज
- मोबाइल नंबर (केवल जनगणना संबंधी संचार हेतु)
जवाब नहीं दे पाए तो क्या होगा
जनगणना एक कानूनी प्रक्रिया है इसलिए हर नागरिक के लिए सवालों के जवाब देना अनिवार्य है। यदि कोई व्यक्ति जानकारी देने से मना करता है या गलत जानकारी देता है तो उस पर जुर्माना लगाया जा सकता है।
सबसे बड़ा नुकसान यह होता है कि सरकार उस इलाके की सही स्थिति नहीं जान पाती। इससे वहां के लिए राशन, स्कूल, अस्पताल और अन्य विकास योजनाओं का बजट कम रखा जा सकता है। ऐसे में न सिर्फ इलाके की जनता प्रभावित होती है बल्कि विकास योजनाओं का लाभ भी सही तरीके से नहीं पहुंच पाता।
क्या जनगणना से नागरिकता पर असर पड़ेगा?
कई लोग सोचते हैं कि जनगणना में सवालों का जवाब न देने से उनकी भारतीय नागरिकता खतरे में पड़ सकती है। यह सही नहीं है। नागरिकता तय करने के लिए अलग कानून और प्रक्रिया होती है। जनगणना का मकसद किसी की पहचान छीनना नहीं है यह जानना है कि देश में लोगों को किन सुविधाओं की जरूरत है और विकास कितनी दूर तक पहुंचा है। जनगणना के आंकड़े सरकार को यह तय करने में मदद करते हैं कि किसी इलाके में कितने स्कूल, अस्पताल, सड़क और अन्य सुविधाएं जरूरी हैं। जब लोगों से सही जानकारी मिलती है तभी योजनाएं जमीन पर सही तरीके से लागू हो पाती हैं।
जनगणना में जाति से जुड़ा डेटा भी होगा शामिल
सरकार ने तय किया है कि आने वाली जनगणना में जाति से संबंधित जानकारी भी दर्ज की जाएगी। इस फैसले को राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति ने मंजूरी दी है। यह पहली बार होगा जब देशभर में जाति की गणना पूरी तरह डिजिटल तरीके से की जाएगी।
सरकार का मानना है कि इससे समाज की वास्तविक स्थिति को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा। जाति से जुड़ा सही और विस्तृत डेटा मिलने पर सामाजिक और आर्थिक योजनाओं को ज्यादा सटीक तरीके से तैयार किया जा सकेगा। विविधताओं से भरे देश भारत में यह जानकारी योजनाओं को सही लोगों तक पहुंचाने और नीति निर्माण में अहम भूमिका निभाएगी।
30 लाख कर्मचारी रहेंगे तैनात
जनगणना 2027 के लिए सरकार बड़े पैमाने पर मानव संसाधन तैनात करने जा रही है। इस अभियान में करीब 30 लाख कर्मचारियों को मैदान में उतारा जाएगा जिनमें गणनाकर्ता, अधीक्षक, मास्टर ट्रेनर और तकनीकी स्टाफ शामिल होंगे। यह प्रक्रिया अब तक की सबसे बड़ी डिजिटल जनगणना मानी जा रही है। कहा जा रहा है इस पूरे अभियान से लगभग 1.02 करोड़ मानव-दिवस का रोजगार भी सृजित होगा। जनगणना से जुड़े कर्मचारी अपनी नियमित जिम्मेदारियों के साथ यह काम करेंगे जिसके बदले उन्हें निर्धारित मानदेय दिया जाएगा।
ऑनलाइन और ऑफ़लाइन दोनों तरीके से होंगे जनगणना
इस बार जनगणना में लोगों को खुद जानकारी देने की सुविधा भी मिलेगी। सरकार सेल्फ-इन्यूमरेशन का विकल्प उपलब्ध करा रही है जिसके तहत नागरिक मोबाइल ऐप या वेब पोर्टल पर जाकर अपना विवरण स्वयं भर सकेंगे। इससे पूरी प्रक्रिया जल्दी पूरी होगी और तकनीकी सिस्टम पर दबाव भी कम पड़ेगा।
वहीं जिन लोगों के पास स्मार्टफोन या इंटरनेट की सुविधा नहीं है उनके लिए पहले की तरह फील्ड कर्मचारी घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करेंगे, ताकि कोई भी व्यक्ति जनगणना से बाहर न रह जाए।
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