2025 भारत के लिए प्राकृतिक आपदाओं, भीड़ हादसों, औद्योगिक दुर्घटनाओं, जल संकट और बढ़ते जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा चेतावनी भरा साल साबित हुआ—पंजाब में 40 साल की सबसे भीषण बाढ़ से लेकर उत्तराखंड के फ्लैश फ्लड, भूस्खलन और बादल फटने तक, महाकुंभ और दिल्ली रेलवे स्टेशन की भगदड़ों से लेकर एयर इंडिया फ्लाइट 171 के दर्दनाक क्रैश तक, असम–तेलंगाना–गुजरात की खदानों व फैक्ट्रियों में आग और मजदूरों की मौतों से लेकर दिल्ली–बेंगलुरु–चेन्नई के गंभीर जल संकट तक; सीमा तनाव, मानसून की तबाही, पहाड़ों का टूटना और दुनियाभर में तूफान–भूकंप–जंगल की आग ने साफ कर दिया कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य नहीं बल्कि आज की कड़वी सच्चाई है। उत्तर प्रदेश और बिहार राज्यों में बाढ़ का कहर व्यापक रूप से देखने को मिला। वहीं उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में बाढ़ का सैलाब तेजी से बढ़ा, जिससे लोग एक स्थान से दूसरे स्थान पर रहने को मजबूर हो गए। खाने-पीने का सामान और घर-गृहस्थी की अधिकांश वस्तुएं बाढ़ में बह गईं। इसके साथ ही चित्रकूट में भी ग्रामीण पानी के संकट से जूझते नजर आए। इन हादसों ने दिखाया कि तकनीक, व्यवस्थाएँ और कागज़ी योजनाएँ तब तक अधूरी हैं जब तक समय रहते तैयारी न हो; इसलिए भारत के लिए सबसे जरूरी है मजबूत पूर्व चेतावनी सिस्टम, जल संरक्षण, सुरक्षित इंफ्रास्ट्रक्चर, भीड़ प्रबंधन, मजदूर सुरक्षा और जलवायु नीति पर गंभीरता से काम करना, क्योंकि 2025 ने हमें स्पष्ट संदेश दिया है कि अगर हम अभी नहीं जागे, तो आने वाले साल और कठोर होंगे, लेकिन सही कदम उठाए जाएँ तो यही चुनौतियाँ देश को सुरक्षित, सक्षम और भविष्य के लिए तैयार करने का अवसर भी बन सकती हैं।
ये भी देखें –
Delhi Flood: दिल्ली में रह रहे पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थी, बाढ़ के बीच नागरिकता और रोज़गार की चुनौती
यदि आप हमको सपोर्ट करना चाहते है तो हमारी ग्रामीण नारीवादी स्वतंत्र पत्रकारिता का समर्थन करें और हमारे प्रोडक्ट KL हटके का सब्सक्रिप्शन लें’
If you want to support our rural fearless feminist Journalism, subscribe to our premium product KL Hatke