खबर लहरिया Blog एकमात्र BSP विधायक (MLA) उमा शंकर के घर छापेमारी, उमा शंकर के स्वास्थ्य को लेकर बसपा, सपा (SP) ने जताई चिंता 

एकमात्र BSP विधायक (MLA) उमा शंकर के घर छापेमारी, उमा शंकर के स्वास्थ्य को लेकर बसपा, सपा (SP) ने जताई चिंता 

बहुजन समाज पार्टी (BSP) के एकमात्र विधायक उमा शंकर सिंह के लखनऊ और बलिया स्थित आवासों पर छापेमारी की गई। यह छापेमारी आयकर विभाग ने कल बुधवार 25 फरवरी को की। छापेमारी का फिलहाल कारण सामने नहीं आया है। वहीं इस छापेमारी को बसपा प्रमुख मायावती ने इस कार्रवाई को गलत और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इसे सरकारी डकैती बताया। बीजेपी मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने भी इस कार्रवाई पर सवाल उठाया है। 

बसपा विधायक उमा शंकर की तस्वीर (फोटो साभार: Uma Shankar Singh फेसबुक अकाउंट)

यूपी में बहुजन समाज पार्टी (BSP) का राजनीतिक प्रभाव धीरे-धीरे खत्म होता जा रहा है। चुनावी हलचल में भी बसपा पार्टी नज़र नहीं आती है। ऐसे में बसपा पार्टी के ऊपर और एक और खतरा नज़र आ रहा है। अब इनकम टैक्स की नज़र बसपा के एकलौते विधायक उमा शंकर सिंह (55 वर्ष) पर है। आयकर विभाग द्वारा विधायक उमा शंकर के घर छपेमारी ने एक बार फिर पार्टी पर कई सवाल खड़े कर दिए है। 

वर्तमान में बसपा के एकमात्र विधायक 

न्यूज़ 18 की रिपोर्ट के मुताबिक उमा शंकर ने बहुजन समाज पार्टी 2011 में ज्वाइन की। इसके बाद 2012 में रसरा से पहली बार विधायक चुने गए। उस वर्ष बसपा की सीटों में भारी गिरावट के बावजूद, सिंह ने 84,000 से अधिक वोट हासिल किए। समाजवादी पार्टी के अपने प्रतिद्वंद्वी को बड़े अंतर से हराया। उन्होंने 2017 और 2022 में भी यह सीट बरकरार रखी, जो लगातार तीसरी जीत थी। वर्तमान में वह राज्य विधानसभा में बलिया जिले के एकमात्र विधायक है और रसरा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं।

विधायक उमा शंकर दो वर्षों से कैंसर के मरीज 

विधायक उमा शंकर दो साल से स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं। बसपा प्रमुख मायावती और बीजेपी पार्टी के राज्य मंत्री के सोशल मीडिया से यह बात समाने आई कि उन्हें कैंसर है। इस वजह से वर्तमान में अपने आवास पर एकांतवास में हैं और विधानसभा सत्र में भाग लेने में असमर्थ हैं।

इस छापेमारी पर बीजेपी पार्टी के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि – “यह सही समय नहीं है। बदले की भावना से प्रेरित होकर किसी को दंड पहुंचाने और पीड़ा पहुंचाने का अवसर हो सकता है?” 

उन्होंने मीडिया से कहा – “दो साल से अधिक समय से वह जीवन और मृत्यु के बीच जूझ रहे हैं। मौजूदा हालात में उनका सारा समय और पैसा कमाने पर नहीं, बल्कि अपनी जान बचाने पर खर्च हो रहा है। उनके लगभग सभी व्यवसाय ठप्प हो गए हैं।”

छापेमारी की बसपा और सपा ने की निंदा 

बसपा प्रमुख मायावती ने विद्यायक उमा शंकर के स्वास्थ्य को देखते हुए कहा – “ऐसी स्थिति में आयकर विभाग को अगर इनके सम्बन्ध में कोई शिकायत मिली थी तो वे इनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर इनके ठीक हो जाने के उपरान्त इनसे पूछताछ कर सकते थे। हम कोई इस विभाग के कार्य में दख़ल नहीं दे रहें, लेकिन आज जिस तरह से इन पर अति-गंभीर बीमारी के दौरान कार्रवाई की गयी है वह अति-दुर्भाग्यपूर्ण है और मानवता के ख़िलाफ है।”

“भाजपाई छापे सरकारी डकैती होते हैं” – अखिलेश यादव 

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया X पर पोस्ट कर लिखा – “भाजपा के छापे लोगों के कमाये गये पैसों को लूटने का काम करते हैं। भाजपाई जहाँ भी देखते हैं कि कहीं धन-दौलत जमा होने की संभावना हो सकती है, वहाँ अपनी एजेंसियाँ लेकर पहुँच जाते हैं। भाजपाई हृदयहीन हैं, इसीलिए संवेदनहीन भी हैं। भाजपाई यह भी नहीं देखते हैं कि कोई व्यक्ति किसी अति गंभीर बीमारी से जूझ रहा है या किसी और परेशानी या दिक़्क़त का सामना कर रहा है।”

मीडिया में विधायक उमा शंकर के घर छापेमारी उनकी सपंत्ति को लेकर हो रही है। यह कार्रवाई चल और अचल संपत्तियों से संबंधित वित्तीय लेनदेन और दस्तावेजों की जांच से जुड़ी है। हालांकि, आयकर विभाग ने अभी तक छापेमारी के कारण की कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। 

न्यूज़ 18 की रिपोर्ट के अनुसार इस तरह की छापेमारी पहली बार नहीं है हुई है। लगभग 11 महीने पहले, सतर्कता विभाग ने अनुपातहीन संपत्ति के आरोपों की जांच शुरू की थी। यह जांच उनकी पत्नी पुष्पा सिंह, बेटे युकेश और बेटी यामिनी के नाम पर कथित तौर पर खरीदी गई संपत्तियों तक फैली हुई थी।

जांच में जमीन, आवासीय मकान, फ्लैट, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और कृषि संपत्तियां शामिल थीं। सतर्कता अधिकारियों ने पंजीकृत संपत्तियों के संबंध में जानकारी के लिए आईजी प्रयागराज को पत्र लिखने सहित कई विभागों से विवरण मांगे थे। जांच के तहत वाराणसी जैसे जिलों के उप-पंजीयक कार्यालयों से भी रिकॉर्ड एकत्र किए गए थे।

इस साल यूपी में विधानसभा चुनाव होने हैं और ऐसे में यह छापेमारी बसपा पार्टी को जड़ से खत्म करने की एक राजनीतिक साजिश हो सकती है। 

 

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