फिल्मी दुनिया – कोर्ट में इंसाफ की जगह तारीख पे तारीख

06-05-15 Mano Film - Courtभारतीय फिल्मों जब भी किसी कोर्ट केस की बात होती है तो सबसे पहले याद आता है, एक डायलाग। तारीख पे तारीख…यह डायलाग बहुत चर्चित फिल्म दामिनी का है। बलात्कार का सामना करने वाली इस फिल्म में लड़की को न्याय की जगह तारीखें मिलती हैं।
वकील बने सनी देओल इस डायलाग को बोलकर न्यायलय को उसका आईना दिखाते हैं। बस ऐसा ही कुछ कोर्ट फिल्म में भी है। इस फिल्म के जरिए भी न्याय प्रक्रिया में होने वाली देरी पर सवाल खड़े किए गए हैं। यह फिल्म एक मराठी लोक गायक के इर्दगिर्द घूमती है। यह मराठी लोक गायक गाने के साथ साथ बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाता है। नारायण को एक सफाई कर्मचारी की आत्महत्या के मामले में गिरफ्तार कर लिया जाता है। यहीं से शुरू होता है कोर्ट केस। नारायण का वकील और सरकारी वकील सुबूत रखते हैं, बहस करते हैं। लेकिन न्याय किसी न किसी कारण से हर कोर्ट की तारीख में एक नई तारीख मिल जाती है। हमारी न्याय प्रक्रिया पर व्यंग्य करती हुई एक घंटे सोलह मिनट की इस मराठी फिल्म का मजा वही लोग उठा पाऐंगे, जिन्हें असल मुद्दों पर बहस करना जंचता है। नाच गाने, हीरो हीरोइन के ठुमके और लुभावने दृश्यों को फिल्म में देखने के शौकीन लोगों को यह फिल्म थोड़ा निराश करेगी। मगर जमीनी सच्चाई को मजेदार ढंग से देखने के शौकीन लोगों के लिए यह एक खास फिल्म साबित हो सकती है।
इस फिल्म के डायरेक्टर चैतन्य तम्हाने और लोक गायक की भूमिका में वीरा साथीदार हैं। लोक गायक के वकील विवेक गोम्बर और सरकारी पक्ष की वकील बनी हैं गीतांजलि कुलकर्णी।