बुंदेलखंड के चुनावी मैदान में इतिहास रचाती किरन वर्मा

जिला बांदा, तहसील नरैनी, 7 दिसंबर 2016। किरन वर्मा, 40, छह सालों से बुंदेलखंड की राजनीति में हैं। उन्होंने 2010 में बहुजन समाज पार्टी के सदस्य के रुप में राजनीति में प्रवेश किया था। हालांकि 2014 से वह भारतीय जनता पार्टी का दामन पकड़ चुकी हैं। किरन बांदा जिले के बिसंडा के एक साधारण अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखती हैं और 2017 उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में वह नरैनी क्षेत्र से विधायक पद का टिकट मिलने की उम्मीद में हैं, जिसके लिए उन्होंने अपना प्रचार भी शुरू कर दिया है।

किरन राजनीति में अपने पति के सहयोग से आई हैं। वह कहती हैं, “मेरे पति ने मुझसे समाज सेवा करने की प्ररेणा दी, जिसके कारण ही आज मैं जनसेविका के रुप में राजनीति में हूं।” किरन का सपना हैं कि वह आम जनता के लिए कुछ ऐसा काम करे, जिसके लिए लोग उन्हें याद रखे।

मशहूर होने की आस लिए किरन आजकल लोगों की समस्या को जान रही़ हैं और इस तरह जमीनी नेता बनने की कोशिश कर रही हैं। किरन का पूरा ध्यान रोजगार और सिंचाई जैसे मुद्दों पर है। वह कहती हैं, “हमारे युवाओं को उनके शहर और कस्बे में ही काम मिलना चाहिए।” बुंदेलखंड के सूखे खेतों की सिंचाई के लिए भी वह बहुत कुछ करना चाहती हैं।

किरन ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए बहुत कुछ सोच रखा है। वह कहती हैं, “मैं हर समुदाय की महिलाओं को आगे लाना चाहती हूं। महिलाएं अपने घरों से बाहर निकलकर कुछ काम करें, जिससे समाज का कुछ उत्थान हो।”

किरन वर्मा जिला पंचायत अध्यक्ष भी रह चुकी है। पर समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी ने मिलकर उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव देकर उन्हें इस पद से निकाल दिया था। आज उनके गिनती बीएसपी छोड़े नेताओं में है।

खैर किरन को इस विधान चुनाव में टिकट मिलने की पूरी उम्मीद है– “100%” – और अगर वह इस चुनाव में जीतती हैं, तो वह इस इलाके की पहली दलित महिला विधायक होने के साथ ही बुंदेलखंड के इस पुरुष बहुलक गढ़ को तोड़ने वाली पहली महिला बनेंगी।  

रिपोर्टर- मीरा देवी और गीता