केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक पदों पर एक तिहाई जगह खाली

भारत दुनिया की शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और इस देश में दुनिया की सबसे बड़ी कामकाजी उम्र वाली आबादी रहती है। लगभग 861 मिलियन लोगों की आयु 15 और 64 वर्ष के बीच हैं। ये आंकड़े इस बात पर जोर देते हैं कि भारत के भविष्य के विकास के लिए शिक्षा क्यों महत्वपूर्ण है।

लेकिन फिर भी, भारत के केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक पदों का एक तिहाई जगह खाली हैं। किसी भी भारतीय विश्वविद्यालय का वैश्विक शीर्ष 100 विश्वविद्यालय में स्थान नहीं है। इस साल हासिल की गई उच्चतम रैंक भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान द्वारा 420 थी। यहां यह जान लेना भी जरूरी है कि भारत में 36.6 मिलियन विश्वविद्यालय के छात्र हैं।

पिछले चार सालों से 2018 तक, भारतीय विश्वविद्यालयों की रैंकिंग में लगातार गिरावट आई है। 2014 में, भारतीय विश्वविद्यालय में सबसे उच्च रैंक 328 था, 2015 में यह 341 था,  2016 में, यह 354 हो गया और 2017 में, यह 397 था।

ये रैंक मुख्य रूप से शोध पत्रों की संख्या और गुणवत्ता पर यह ध्यान केंद्रित करते हैं कि शीर्षस्तर या प्रभावशाली पत्रिकाओं में कितने दिखाई देते हैं और अन्य शोधकर्ताओं द्वारा कितने उद्धृत किए जाते हैं। प्रोफेसर शिक्षण कर्तव्यों के अलावा अकादमिक शोध करने में अग्रणी भूमिका निभाते हैं। लेकिन केंद्रीय विश्वविद्यालयों में 5,606 रिक्त पदों के साथ भारत प्रोफेसरों से कमी है, यानी रिक्त पदों का आंकड़ा 33 फीसदी है, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में, 2,802 (34 फीसदी) शिक्षण पद रिक्त हैं।

सरकार कहती है कि भर्ती विश्वविद्यालयों द्वारा नियंत्रित की जाती है, और मंत्रालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग केवल प्रक्रिया की निगरानी करते हैं। भारत के मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने लोकसभा को 23 जुलाई, 2018 को बताया, “रिक्तियों को भरना एक सतत प्रक्रिया है। विश्वविद्यालय स्वायत्त संस्थान हैं, वे खाली शिक्षण पदों को भरने के लिए निहित हैं।

एचआरडी मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने 2014 में शिक्षा पर अपने सकल घरेलू उत्पाद का 4.13 फीसदी खर्च किया था। यह ब्रिटेन, अमेरिका और दक्षिण अफ्रीकी देशों से कम है, जो शिक्षा पर जीडीपी का क्रमशः 5.68 फीसदी, 5.22 फीसदी और 6.05 फीसदी खर्च करते हैं।2018-19 में शीर्ष 100 विश्वविद्यालयों में से 51 अमेरिका और 8 ब्रिटेन से थे।  

भारत सरकार अनुसंधान पर बढ़ते ध्यान के साथ उच्च शिक्षा वित्त पोषण बढ़ाने की योजना बना रही है।

साभार: इंडियास्पेंड