17 माह बाद पाकिस्तान जेल से छूटे मछुवारे

कई राज्यों में यदि इस तरह लोग फौज द्वारा पकड़े जाएं तो राज्य सरकार उनके परिवारों की मदद करती है पर उत्तर प्रदेश सरकार ने इन मछुवारों के परिवारों को कोई सहायता नहीं दी।
कई राज्यों में यदि इस तरह लोग फौज द्वारा पकड़े जाएं तो राज्य सरकार उनके परिवारों की मदद करती है पर उत्तर प्रदेश सरकार ने इन मछुवारों के परिवारों को कोई सहायता नहीं दी।

जिला बांदा। बांदा के रहने वाले चार मछुवारे पाकिस्तान जेल से रिहा होकर लौट आए।

ब्लाक तिन्दवारी के गांव बेंदा घाट के मछुवारे सुरेन्द्र सिंह ने बताया कि वे गुजरात राज्य में ओखा बार्डर पर समुद्र में नाव लेकर निकले थे। गलती से वे भारत-पाकिस्तान बार्डर के पास पहुंच गए। उन्हें गुसपैठ समझकर फौज उनकी नाव के साथ पाकिस्तान के कराची शहर ले गई। वहां की लांदी जेल में रोज़ दो घंटे काम, नाश्ते में एक रोटी और चाय और दोपहर में दो रोटी और दाल खाकर डेढ़ साल उन्होंने जेल में काटे।

सुरेंद्र ने बताया कि उस जेल में महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों के लगभग पांच सौ मछुवारे थे। सुरेन्द्र सिंह की पत्नी तारावती ने कहा कि उन्हें किसी का सहयोग नहीं मिला। लौटने के बाद ही मीडिया के लोग पहुंचे। डेढ़ साल, बिना किसी मदद के अकेले उन्हांेने अपने पांच बच्चों को चाट का ठेला लगाकर पाला।
जगदीश बताते हैं कि गलती से बार्डर पार करने पर पाकिस्तान की सेना ने पकड़ लिया। उनका मानना है कि जब चुनाव के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ को न्यौता दिया तभी दोनों देशों के बीच स्थिति थोड़ी सुधरी और कुछ कैदियों को रिहा किया गया।