होली का त्यौहार हो और रंगों का बाजार हो, तो गीत क्यों न शुमार…

23/03/2016 को प्रकाशित

होली का त्यौहार हो, रंगों का बाजार हो,
बांदा की सड़क हो, गुलालों की बहार हो और
खबर लहरिया के पत्रकार हो,
तो गीत क्यों न शुमार हों!!!