सुभाष चद्र बोस की अनसुलझी दास्तां

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परिचय 

सुभाष चन्द्र बोस (जन्म: 23 जनवरी 1897, मृत्यु: 18 अगस्त 1945) जो नेता जी के नाम से भी जाने जाते हैं, भारत के स्वतन्त्रता संग्राम के मुख्य नेता थे। उनका मानना था कि अंग्रेजों के दुश्मनों से मिलकर आज़ादी हासिल की जा सकती है। दूसरा विश्व युद्ध (1939 से 1945 तक चलने वाला यह विश्व-स्तरीय युद्ध था। 30 से अधिक देशों की थल-जल-वायु सेनाएँ इस युद्ध में सम्मलित थीं।) के दौरान, अंग्रेज़ों के खिलाफ लड़ने के लिये, उन्होंने जापान के सहयोग से आज़ाद हिन्द फौज का गठन किया था। उनके द्वारा दिया गया जय हिन्द का नारा भारत का राष्ट्रीय नारा बन गया है। “तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा” का नारा भी उनका उस समय बहुत मशहूर हुआ।

द्वितीय विश्वयुद्ध में जापान की हार के बाद, नेताजी को नया रास्ता ढूँढना जरूरी था। उन्होने रूस से सहायता माँगने का निश्चय किया था। 18 अगस्त 1945 को नेताजी हवाई जहाज से मंचूरिया की तरफ जा रहे थे, चीन और रूस के बीच । इस सफर के दौरान वे लापता हो गये। इस दिन के बाद वे कभी किसी को दिखायी नहीं दिये।

23 अगस्त 1945 को जापान के टोकियो रेडियो ने बताया कि सैगोन में नेताजी एक बड़े बमवर्षक विमान से आ रहे थे कि 18 अगस्त को ताइहोकू हवाई अड्डे के पास उनका विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। नेताजी गम्भीर रूप से जल गये थे। स्वतन्त्रता के बाद भारत सरकार ने इस घटना की जाँच करने के लिये 1956 और 1977 में दो बार आयोग नियुक्त किया। दोनों बार यह नतीजा निकला कि नेताजी उस विमान दुर्घटना में ही मारे गये। लेकिन जिस ताइवान की भूमि पर यह दुर्घटना होने की खबर थी उस ताइवान देश की सरकार से इन दोनों आयोगों ने कोई बात ही नहीं की।

1999 में मनोज कुमार मुखर्जी के नेतृत्व में तीसरा आयोग बनाया गया। 2005 में ताइवान सरकार ने मुखर्जी आयोग को बताया – 1945 में ताइवान की भूमि पर कोई हवाई जहाज दुर्घटनाग्रस्त हुआ ही नहीं था। 2005 में मुखर्जी आयोग ने भारत सरकार को अपनी रिपोर्ट पेश की।  इसमें उन्होंने कहा कि नेताजी की मृत्यु उस विमान दुर्घटना में होने का कोई सबूत नहीं हैं।

18 अगस्त 1945 के दिन नेताजी कहाँ लापता हो गये और उनका आगे क्या हुआ यह भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा रहस्य बन गया है।

क्या है अभी की स्थिति :

इस साल के अंत तक जापान नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु से सम्बंधित दो फाइलों को अपनी गुप्त सूची से हटा देगा। मगर बाकि बची तीन फाइलों के बारे में कोई आश्वासन नहीं दिया है।

गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू ने लोक सभा में बताया कि यह पांच फाइलें 70 साल पहले बोस के अचानक गायब हो जाने के रहस्य से पर्दा उठाने में महत्त्वपूर्ण सिद्ध हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि “जापान ने हमें कहा है कि वे पांच फाइलों में से दो फाइल इस साल के अंत तक अपनी गुप्त सूची से हटा देगा।  मगर बाकी बची फाइलों के लिए कोई आश्वासन नहीं दिया गया है।  मगर हमें आशा है कि वे बाकी बची फाइलों को भी गुप्त सूची से हटा देंगे,”।
 रिजिजू ने यह भी बताया कि बोस से सम्बंधित प्रधानमंत्री कार्यालय और गृह मंत्रालय में रखी दो फाइलें गायब हो गयीं थीं। उन्हें ढूंढने की कोशिशें जारी हैं।  दोनों फाइलें बोस की अस्थियों को रेंकोजी मंदिर, जापान से भारत वापस लाने से सम्बंधित थीं। प्रधानमंत्री कार्यालय में रखी फ़ाइल में लाल किले पर उनकी मूर्ती लगाने से सम्बंधित सन्दर्भ भी थे। लोक सभा में रिजिजू ने कहा कि “हम नहीं बता सकते की नेताजी के साथ क्या हुआ था”।
रिजिजू ने कहा कि कई देशों ने बोस से सम्बंधित कागज़ात भारत को वापस लौटाने के अनुरोध पर प्रतिक्रिया की है।  ऑस्ट्रिया, रूस और अमेरिका ने कहा है कि उनके पास ऐसी कोई फाइलें नहीं हैं।  ब्रिटेन ने कहा है कि उसके पास मौजूद 62 फाइलों को उसने ब्रिटिश लाइब्रेरी को सौंप दिया था।  ये सार्वजिनिक प्रयोग के लिए मौजूद हैं।  जर्मनी ने भी कहा कि इस तरह की फाइलों को उसने गुप्त सूची से हटा कर आर्काइव कर दिया है। अब तक लगभग 150 फाइलों को गुप्त सूची से हटा दिया गया है और वे ऑनलाइन उपलब्ध हैं।  हर महीने 25 और फाइलों को अपलोड किया जा रहा है।
 अक्टूबर 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बॉस के परिवार वालों से मिले और घोषणा की कि सरकार बोस से सम्बंधित सारी फाइलों को गुप्त सूची से हटा देगी।
साभार : द वायर (http://thewire.in/2016/04/26/japan-to-declassify-two-bose-files-by-end-2016-31716/)