सुखार के मार से लोग बिमार

वर्षा न होय के कारण उत्तर बिहार के सब किसान सुखार के मार झेल रहल छथिन।
धान के फसल न होय से किसान चिन्तीत छथिन। इ समस्या झेल रहल किसान के लेल राज्य सरकार डीजल अनुदान वितरण करवई छथिन। केन्द्र सरकार से तेतीस जिला के सुखाग्रस्त घोषित करवा के अनुदान देबे के लेल मांग कलथिन।
सरकार के इ सोच देख के लोग के कुछ दिल में शांति त मिललई। लेकिन धान न होय से काफी दुःखी भी छथिन। कोई योजना त लागु करई छथिन सरकार लेकिन कहां तक लाभ मिल पवई छई। एईसन देखल जाई छई कि जेकर लाठी ओकर भैंस। जे बोले बाला छथिन उनके सब सुविधा मिल जाई छई। लेकिन मारल जाई छई छोट किसान। उनकर न पहुंच पवई छई न उ सब कुछ जान पवई छथिन। जेई कारण सुविधा से बंचित रह जाईछई। जेई से अपन जिन्दगी में हमेशा गरीबी के समस्या झेलते रहई छथिन। एई के लेल सरकार योजना के लाभ के लेल घोषणा करई छथिन त  जाँच  कके लाभ देवे के नियम भी बनइथिन तभीये सब के लाभ मिल पतई।
किसान के लेल सुखाग्रस्त घोषित कलथिन ह सरकार कि ओई से उ खुशहाल जीवन रह सकई छथिन। एई के लेल किसान के पन्द्रह सौ रुपईया एक कुण्टल अनाज से कथि होतई ? लेकिन एगो कहावत हई ओंस के बुन्द चाटे से पीआस मर जाई छई।