साल बीता मगर सांसद निधि जस की तस

(फोटो साभार: विकिपीडिया)
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भारत। भाजपा आधारित केंद्र सरकार को सत्ता में आए एक साल हो गया है। पांच सौ बयालिस में दो सौ इक्यासी सीटें जीतकर आई इस नई सरकार ने जनता से कई वादे किए थे। उनमें से एक वादा था हर संसदीय सीट सेे सांसदों को उनकी सीट में हो रहे विकास का ब्यौरा प्रधानमंत्री कार्यालय को देना पड़ेगा।

लेकिन आंकड़ों की मानें तो चुने गए पचपन प्रतिशत सांसदों ने सांसद निधि के पांच करोड़ में से एक भी रुपया क्षेत्रों में खर्च नहीं किया है। विकास के आंकड़ों पर नज़र रखने वाली एक संस्था इंडिया स्पेंड ने इस रिपोर्ट को तैयार किया है। मिनिस्ट्री आफ स्टैटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इंपलिमेंटेशन से निकाले गए आंकड़ों में पचपन प्रतिशत सांसदों ने स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के तहत मिलने वाले फंड का एक भी पैसा अब तक इस्तेमाल नहीं किया है।

इन सांसदों में कई बेहद चर्चित चेहरे भी शामिल हैं। लखनऊ के सांसद गृह मंत्री राजनाथ सिंह, दक्षिणी बेंग्लुरु से सांसद और केंद्रीय रसायन और उर्वरक खाद मंत्री अनंथ कुमार, उत्तर बेंग्लुरु सांसद और केंद्रीय कानून मंत्री डी.वी. सदानंद गौड़ा, देवरिया के सासंद कलराज मिश्र, झांसी से सांसद उमा भारती, कांग्रेस की सोनिया गांधी, कानपुर के मुरली मनोहर जोशी, समाजवादी पार्टी के मुलायम सिंह यादव।

1993 में पांच लाख रुपए सांसद निधि थी, जो 1994-95 में बढ़कर एक करोड़ हो गई। 1998 में दो करोड़ और 2011 में इसे बढ़ाकर पांच करोड़ कर दिया गया।