सांप्रदायिक हिंसा के बाद डरा हुआ मुस्लिम समुदाय

(फोटो साभार: इंडियन एक्सप्रेस)
(फोटो साभार: इंडियन एक्सप्रेस)

बल्लभगढ़, हरियाणा। यहां के अटाली गांव में 26 मई को जाट और मुस्लिम समुदाय के बीच सांप्रदायिक हिंसा हुई। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने गांव छोड़ दिया है। कुछ लोग बल्लभगढ़ पुलिस थाने में तो कुछ अपने रिश्तेदारों के घर में रह रहे हैं।

हिंसा मस्जि़द निर्माण को लेकर शुरू हुई थी। मस्जिद की इस ज़मीन पर लंबे समय से विवाद चल रहा था। यह मस्जि़द अभी टीन के नीचे थी। हिंदू समुदाय के लोग मस्जिद के खिलाफ हैं। पिछले साल ही सिटी कोर्ट ने फैसला मुस्लिम समुदाय के हक में सुनाया। विवादित ज़मीन के पास ही एक मंदिर भी है। इस कारण यहां छोटी मोटी हिंसा हमेशा होती रहती है।

दयावती नाम की एक साठ साल की महिला ने बताया कि हम मंदिर में कीर्तन कर रहे थे। तभी कुछ लोगों ने आकर हमें लाउडस्पीकर बंद करने के लिए कहा। जब हमने नहीं बंद किया तो पत्थरबाजी शुरू कर दी। अगर हमारे लड़के नहीं आते तो यह लोग हमें बुरी तरह जख्मी कर देते। दूसरी तरफ इसी गांव के माजिद ने बताया कि मामला मस्जिद निर्माण को रोकने से जुड़ा है। एक हिंदू युवा लड़के ने कहा कि यह लोग हमारी लड़कियों के साथ छेड़छाड़ करते हैं। उन्हें प्यार में फंसाकर धर्म परिवर्तन का अभियान चला रहे हैं। साथ में खड़े एक बुजुर्ग ने बात काटते हुए कहा कि इस गांव के असली मालिक हम हैं। उन्हें मान लेना चाहिए कि वह बाहरी हैं। इसलिए उन्हें यहां के नियम कायदे मानने पड़ेंगे।

फरीदाबाद के पुलिस कमिश्नर सुभाष यादव ने कहा कि कुछ लड़कों को गंभीर चोटें आईं हैं। मगर सभी खतरे से बाहर हैं। गांव में सेना तैनात है। हम दोनों पक्षोें के बीच सुलह कराने की कोशिश कर रहे हैं।

मस्जिद बनाएं मगर पहले शर्ते मानें
गांव के जाट समुदाय के लोगों का कहना है कि अगर मुस्लिम गांव में लौटना चाहते हैं तो शौक से लौटें। मस्जिद भी बना सकते हैं। मगर कुछ शर्ते उन्हें पूरी करनी पड़ेंगी। पहला तो उन्होंने जो केस हिंदू लड़कों के खिलाफ किए हैं उसे वापस लें। दूसरा मस्जिद की बाउंड्री ज़्यादा ऊंची नहीं बनवाएं। तीसरा लाउडस्पीकर लगाकर नमाज़ नहीं पढ़ेंगे। चैथा इसमें जो ईमाम रखा जाए वह स्थानीय हो। मस्जिदों में ईमाम तबलिगी जमात यानी मुस्लिमों की धार्मिक जमात से चुना जाता है। अगर इन शर्तों को मान लें तो वह यहां लौट सकते हैं।

पंचायत चुनाव हैं करीब
गांव में अगस्त में ही पंचायत चुनाव होने हैं। कुछ लोगों की मानें तो यह हिंसा चुनाव में वोट हथियाने का भी आधार है। पिछले साल जब अदालत का फैसला आया था कि जमीन वक्फ बोर्ड की है तो मौजूदा हिंदू प्रधान ने सबको मनाने की कोशिश की थी कि हमें इस फैसले को मान लेना चाहिए। इस पर हिंदू समुदाय में नाराजगी भी थी। अब कुछ लोग मस्जिद का मसला उठाकर हिंदू वोट हथियाना चाहते हैं।