सरकार खा सोचें खा चाही

उत्तर प्रदेश सरकार आदमियन खा नौकरी तो देत हे। पे कोनऊ की मांगे पूरी नई होत तो कोनऊ को वेतन समय से नई भेजत हे। जीसे सरकारी कर्मचारी सड़क में आ जात हें। हम बात करत हे महोबा जिला की 12 नवम्बर 2013 खा सब कर्मचारियन ने 27 सूत्रीय मांगे पूरी करे खा धरना करो हतो। जीमें चार मांग पूरी भई हे।
प्राथमिक स्कूल के हेडमास्टरन ने 9 दिसम्बर 2013 खा 14 सूत्रीय मांगे पूरी करे खा धरना कर मुख्यमंत्री खा ज्ञापन भेजो हे। ऐलान करो हे कि अगर मांगें पूरी न हो हें, 18 दिसम्बर 2013 खा लखनऊ मुख्यमंत्री के एते धरना देबी। दूसर बात हे स्कूल मंे खाना बनाये वाली रसोइयन को जुलाई से वेतन नई आओ हे। जीसे ऊ परिवार सड़क में भुखमरी के कगार में आ गओ हे। पे सरकार गरीबन पे कछु ध्यान नही देत हे।
सवाल जा उठत हे कि जो काम बंद कर बेठ जात हे तो सरकार खा समझ में आ जात हे। जो रसोइयन कर्ज लेके आपन परिवार चलाउत हे ओर वेतन को आसरा लगाये काम करत हे। ऊखें ऊपर सरकार खा कछु ध्यान नइयां।
सोचे वाली बात तो जा हे कि जीखे पास रूपइया हे ओर महीना भर बिना काम के परिवार चल सकत हे। ऊखों ध्यान सरकार भी ज्यादा देत हे। जोन आदमी मजदूरी के बिना भूखों सो जात हे ऊखे ऊपर कोनऊ को ध्यान नई जात हे।
सोचे वाली बात तो जा हे कि एसी मंहगाई मे दो महीना के वेतन से का परिवार को खर्च चल सकत हे। आखिर सरकार छोटे-बड़े को एसो भेदभाव काय करत हे। या फिर सरकार खा धरना को करें को इन्तजार रहत हे। मांगे ओर वेतन देय की जिम्मेंदारी किखी आय।