सरकार क्यों साधे है चुप्पी?

fainal photo
वेदीमीटिंग मा षामिल कार्यकर्ता

जिला लखनऊ। लखनऊ यू. पी. प्रेस क्लब में 17-18 सितम्बर 2013 को मुजफफर नगर गये लोगों ने आंखो देखी घटना को लोगों के सामने व्यक्त किया। जिसमें पत्रकार और कई संस्थाओं के लोग भी षामिल थे।
वनांगना की पुष्पा ने बताया कि वहां के कैम्पों में जो स्थिति है उसका वर्णन करना बहुत मुष्किल है इतना दिन हो गया अभी तक लोग इतने डरे हंै कि कोई आगे आने को तैयार ही नहीं है। 20-25 लोगों से बात हुई लेकिन सबके मन में इतना डर था कि कोई कुछ बोल ही नहीं रहा था लोगों के सामने इतनी घटनाएं हुई फिर भी सरकार इतने हल्के से ले रही है उन्हें किसी प्रकार की सहायता नहीं मिल रही है।
दिल्ली की प्रतिनिधि दीपा जो कि मुजफफरनगर के लोई रिलीफ कैम्प की स्थित के बारे में बता रही थीं कि वहां की सफाई और स्वास्थ्य के मामलों में इतनी षोचनीय स्थिति है कि उस पर ध्यान नहीं दिया गया तो इसके गम्भीर नतीजे हो सकते है। पिछले हफते आठ मौतें हुई थी जिनमें छह बच्चे शमिल हैं जो डायरिया और बुखार का षिकार बने है। जिसमें एक चार दिन का नवजात षिषु है। इस कैम्प में 67 गर्भवती महिलाएं है जिनके लिए कोई भी चिकित्सीय सुविधा या देखभाल नहीं हो रही है।
सामाजिक कार्यकर्ता अष्क्री नकवी ने बताया कि वहां के डी. एम. षामली का कहना है कि जो षाक्षर है उनको नौकरी दी गई है। वहां की महिलाओं के ऊपर क्या कुछ नहीं गुजरा। इतनी डरी और घबराई है। जो नुकषान हुआ उसके ऊपर सरकार चुप्पी साथे है। सरकार घरों में नुकसान का आकलन गाव जाकर कर रही है। जबकि जिनके घर बर्वाद हुए है वो रिलीफ कैम्प में रह रहे है। जिनसे कोई बात नहीं की जा रही है।