सरकारी दूध डेयरी में समय से नहीं होता भुगतान

parag milk dairy
2006 में दोबारा शुरू हुई बुंदेलखंड में पराग डेयरी

जिला चित्रकूट। बुंदेलखंड क्षेत्र में पराग दूध डेयरी है। हालांकि 1999 से 2005 तक डेयरी बंद रही। 2006 में इसे दोबारा शुरू किया गया। डेयरी में लोग गाय भैसों का दूध बेचते हैं। लेकिन लोगों की शिकायत है कि उत्तर प्रदेश सरकार की डेयरी में दूसरी निजी डेयरियों के मुकाबले कम मूल्य किसानों को मिलता है। इसके अलावा भुगतान भी समय पर नहीं होता।
पहाड़ी ब्लाक के गांव बन्ना ब्यास और रम्पुरिया माफी की प्रेमा और चुन्नी ने बताया कि निजी डेयरी में दूध का मूल्य ज्यादा मिलता है। इसलिए सरकारी डेयरी में हम दूध नहीं बेचते। कर्वी ब्लाक के शोभा पुरवा, कोलगदहिया गांव के मोहन और सम्भू ने बताया कि पराग दूध डेयरी से दो महीने से भुगतान नहीं किया गया है। इसलिए अब हम दूध निजी डेयरी में देते हैं। कर्वी उत्पादक सहकारी संघ के बाबू राज किशोर सिंह ने बताया कि पराग दूध डेयरी की शुरुआत जिले में 1979 में हुई थी। प्रति दिन चार सौ लीटर दूध आता है। लोगों से 30 रुपए लीटर के हिसाब से दूध खरीदते हैं। जबकि दूसरी डेयरियों में 40-50 रुपए प्रति लीटर के भाव से लिया जाता है। अगर जांच में पानी पाया जाता है तो उसी हिसाब से दाम और कम कर दिया जाता है। वैसे तो हर हफ्ते भुगतान करने का नियम है लेकिन इस बार किसानों को दिसम्बर माह के दो हफ्ते का भुगतान नहीं किया गया है।