समाजवादी पेंशन योजना बन गई गांव वालों की टेंशन

IMG-20160413-WA0026 copyसमाजवादी पेंशन योजना अखिलेश सरकार की सबसे प्रमुख योजनाओं में से एक है। अपनी हर रैली में वह इस योजना का जिक्र करते हैं. अभी बजट सत्र के दौरान भी इस योजना का विस्तार किया गया। इन तमाम कोशिशों के बाद भी सरकार इस योजना के कुल लाभार्थियों का पता नहीं लगा पायी है। कब, किसे, कितना पेंशन दिया जाए इस सम्बंध में सरकार के पास कोई पुख्ता जानकारी नहीं है।
अखिलेश सरकार के बुंदेलखंड दौरे के बाद से महोबा और झाँसी में पेंशन योजना को लेकर धरना प्रदर्शन जारी है। इस बीच महिलाएं भी सड़को पर उतर कर हर हफ्ते बुंदेलखंड के किसी भी इलाके में धरने पर बैठ जाती हैं।
अखिलेश सरकार का कहना है कि समाजवादी पेंशन योजना के लिए लाभार्थियों का चयन सबसे ज्यादा चित्रकूट जिले से किया गया है और इस बार फिर से 40000 लोगों के लिए योजना लागू करने का विचार किया है।
ज्ञात है कि सरकार ने पिछले वित्तीय वर्ष में 39 हजार 417 लोगों को पेंशन देने का वादा किया था लेकिन आज भी हजारों लोग पेंशन न मिलने के कारण भटक रहें है।
मऊ की गायत्री ने बताया कि पिछले साल उसने भी समाजवादी पेंशन का फार्म भरा था पर आज तक उसको एक पैसा नहीं मिला। सादिका बेगम कहती हैं कि पेंशन मिल रही थी पर अचानक बीच में बन्द हो गई और इसका अधिकारीयों ने कोई कारण नहीं बताया है।
कर्वी कि सवित्री ने पिछले साल, चार बार अधिकारी को फार्म भर कर दिया पर कुछ हुआ नहीं। वह पैरों के दर्द से परेशान होने के बाद भी जैसे-तैसे अधिकारीयों के पास जाती है लेकिन वहां जा कर पता लगता है कि उनका नाम तो लिस्ट में ही नहीं है.
इसी तरह से हजारों महिलाएं पेंशन के लिए भटक रही है लेकिन सरकार निष्क्रिय है। अब सवाल यह है कि जिस योजना को सरकार इतना बढ़ा-चढ़ा कर चुनाव प्रचार में इस्तेमाल करती आई है और आज भी कर रही है. वो योजना इतनी ठंडी क्यों है? इस मामले में चित्रकूट जिले के समाज कल्याण अधिकारी डी.डी मुदगाल का कहना है कि पिछले वर्ष 39 हजार 417 लोगो के फार्म पास हो गये थे, जिन्हें अब पेंशन मिल रही हैं। जिन्हें नहीं मिली है उन्हें देने का प्रयास जारी है।

यह हैं योजना के मानक…
शहरी इलाके में 8400 और ग्रामीण इलाके में 32000 लोगो को यह सुविधा दी जायेगी। पेंडिंग सूची का सत्यापन जिला स्तरीय अधिकारियों की देख रेख में किया जायेगा।
शहरी क्षेत्र में
अनुसुचित और जनजाति-2320
अल्पसंख्यक-1280
पिछड़े-4800
कुल 8400
ग्रामीण क्षेत्र में
अनुसुचित एंव जनजाति-9280
अल्पसंख्यक-5120
पिछड़े-17600
कुल 32000
इस योजना के लिए इन 6 नियम का पूरा होना जरुरी है।
1- 6 साल से 14 साल तक के बच्चे स्कूल में पढ़े।
2- जन्म से लेकर 6 साल तक के बच्चों का नियमित टीकाकरण हो।
3- गर्भवती महिला का प्रसव आशा कार्यकर्ता द्वारा प्राथमिक सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में करवाया जाये।
4- 6 साल से 14 साल तक के बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कराना जरुरी है।
5- बेसिक शिक्षा विभाग के जिम्मेदारी है कि वह बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी निगरानी करें।

रिपोर्टर: मीरा जाटव