शिक्षा मित्र ने की भूख हड़ताल, मिला सिर्फ भरोसा

सरैंया गांव के हेडमास्टर ने भी शिक्षा मित्र का पक्ष लिया
सरैंया गांव के हेडमास्टर ने भी शिक्षा मित्र का पक्ष लिया

जिला चित्रकूट। यहां शिक्षा मित्र को हर महीने समय से वेतन नहीं मिलती है। 6 अगस्त को शिक्षा मित्रों ने भूख हड़ताल की। शिक्षा विभाग के सत्येंद्र बाबू ने बताया कि अगले दिन जिला निरीक्षण विभाग ने उन्हें भरोसा दिलाया कि बजट आने पर उन्हें मासिक रूप से वेतन दिया जाएगा। इसके साथ ही शिक्षा मित्र अपनी वेतन बढ़ाने की मांग सरकार से लगभग एक साल से कर रहे हैं। कई बार बेसिक शिक्षा विभाग में धरना प्रदर्षन भी किया। अब शिक्षा मित्र लखनऊ शहर में मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने का सोच रहे हैं।

पहाड़ी ब्लाक, गांव अर्जुनपुर का पुरवा लठऊ, गुठऊपुर प्राथमिक स्कूल। यहां के षिक्षा मित्र मंजू सिंह ने बताया कि वेतन छह महीने में एक बार मिलती है। महीने का पैंतिस सौ रुपये वेतन है। इतने में घर का खर्चा नहीं चल पाता है। स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के अलावा कई काम करने पड़ते हैं। नाम तो हमारा शिक्षा मित्र है लेकिन काम सहायक मास्टर जैसे करना पड़ता है।
मानिकपुर ब्लाक, कस्बा मारकुण्डी और करौंहा के प्राथमिक स्कूल। यहां संतोष और राजू शिक्षा मित्र हैं। इन्होंने बताया कि वेतन उतनी ही मिलती है लेकिन जब हेडमास्टर की ड्यूटी और कहीं लगा दी जाती है तो उनका काम भी हम ही करते हैं। यहां भी छह महीने से पहले वेतन नहीं मिलती। मंहगाई तो हर साल बढ़ती है पर वेतन नहीं।