शकुन्तला के संघर्ष अउर हिम्मत भरी कहानी, खुद के जुबानी

DSCN0037-ed-wजिला चित्रकूट, ब्लाक कर्वी, गांव बनाड़ी। हिंया के शकुन्तला के उम्र या समय लगभग सैंतिस साल हवै। वा चार साल से सिलाई कइके अपने दुइ बच्चन का पढ़ावत अउर घर का खर्चा चलावत हवै। यहिसे वा अब अपने बच्चन दुइ बच्चन साथै बहुतै खुशी रहत हवै।
शकुन्तला का कहब हवै कि मोर मइका सरधुवा गांव मा हवै। मैं तीन भाई अउर चार बहिनी रहेन। मैं तीसर नम्बर के हौ। मोर शादी चौदह साल के उम्र मा बनाड़ी गांव मा रहै वाले अभिलाष के साथै बीस साल पहिले भे रहै। मनसवा ठेकेदारी करत रहै। मनसवा का मरे चौदह साल होइगें। जबै से मनसवा मर गा तबे से घर का खाना खर्चा खातिर परेशान रहत रहौ। ससुर इन्द्रजीत घर मा नहीं रहै देत रहै। अउर न तौ घर मा हिस्सा देत रहै। या बात का लइके ससुर रोजै लड़ाई करत रहै। यहिसे परेशान होइके हिम्मत करेंव अउर कोतवाली के कइयौ चक्कर लगायेंव चक्करमा चक्कर लगावैं के बाद कवी। कोतवाली के पुलिस सुनवाई करिस तौ मैं पुलिस का आपन बीती सुनायेंव। यहिसे कर्वी कोतवाली से छह बिगहा जमीन मा एक बिगहा जमीन देवाई गे अउर घर मा भी रहै का मिला। मैं घर मा छोट से परचून के दुकान खोलेंव यहिसे घर का नून रोटी चलत रहै।
अब यहिके बाद मोरे सउहें अपने दुइ लड़कन का पढ़ावै के समस्या आई। उनका कसत पढ़ाव या सोच रहत रहै। यहिके खातिर मै।
बनाड़ी गांव से लगभग सात किलोमीटर दूर बेड़ीपुलिया सिलाई सीखै जात रहौ। हुंवा से सिलाई छह महीना मा सीख गयेंव अउर अब खुदै सिलाई के दुकान खोले हौ। आज मोर बड़ा लड़का लवकुश जेहिके उम्र अटठारह साल हवै। वा इलाहाबाद मा बी. एस. सी. अउर छोट लड़का पिंटू नौ मा पढ़त हवै। यहिसे मोर जिंदगी का सफर बड़ा सघर्ष भरा हवै। मोहिका ससुराल से नहीं बल्कि अपने मइके से थोइ सहारा मिला रहै। मोर बड़ी अहिन मोरे दुख अउर पीरा का समझत रहै। मोरे ससुराल वालेन के लगे रुपिया के कउनौ कमी नहीं रही आय, पै यहिके बादौ उंई मोर कउनौ मद्द नहीं करिन हवै। उनके इनतान के हाल देख के मैं अपने हिम्मत नहीं हारेंव बल्कि मोहिका आगे आवैं का मउका मिला रहै। मैं अपने क्षमता का खुर्द निखारेंव अउर आज खुर्द आत्म विश्वास से अपने घर मा रहत हौ। मै अउर दूसर औरतन का संदेश दें चाहत हौ कि अपने का कमजोर न समझै। हिम्मत करै सफलता जरूर मिली वइसे तौ समाज चाहत हवै कि लड़कियन अउर औरतन का हमेशा दबा के रखै पै मोर मानब हवै कि अगर अपने क्षमता अउर लगन से मंजिल तक पहुंचब मुश्किल नहीं आय।

रिपोर्टर – तबस्सुम