वित्तीय समावेश से दूर भारतीय बैंक खाते

साभार: विकिमीडिया कॉमन्स

80 प्रतिशत भारतीयों के बैंक खाते तो हैं, इसके बावजूद वित्तीय समावेश का स्तर विश्व में देश सबसे बुरा है, जो उप-सहारा अफ्रीका से भी कम है। मोबाइल बैकिंग सुविधा देने के साथ खाताधारक बनाने के लिए लिंग, संपत्ति और शिक्षा का स्तर को नजरअंदाज करने के बावजूद भी कुछ ही खाता धारक बैकिंग सुविधाओं का प्रयोग कर रहे हैं, जो वित्तीय समावेश के सुधार पर उंगली उठा रहा है। ये बात विश्व बैंक की ग्लोबल फिनक्स सर्वे रिपोर्ट में सामने आई है।

देश में बैंक से दूरी वाली जनसंख्या को बैंक से जोड़ने के लिए 2014 में ‘प्रधानमंत्री जनधन योजना’ की शुरूआत की गई, जिससे अंतर्गत तीव्रता से बैंकों में बैंक खाते खुले भी थे। इनमें 1 प्रतिशत खाता धारको ने ओवरड्राफ्ट सुविधा का प्रयोग किया। वहीं 17 प्रतिशत बैंक खाते जीरो बैलेंस हैं, जो प्रयोग में ही नहीं हैं। वहीं देश में मोबाइल बैकिंग का प्रयोग भी कम है।  2017 में 5 प्रतिशत लोग अपनी वित्तीय खातों का उपयोग अपने फोन पर करते हैं, वहीं 2 प्रतिशत जनसंख्या मोबाइल मनी मोबाइल ( मोबाइल से धन का भुगतान करना) से भुगतान का काम करती है। भारत में डिजिटल भुगतान का प्रतिशत उप- सहारा अफ्रीका देशों से भी कम है। 2017 में केन्या में डिजिटल भुगतान 97 प्रतिशत और दक्षिण अफ्रीका में 60 प्रतिशत था, जो भारत में 29 प्रतिशत पर था।

देश में 2014 से 2017 के बीच 79 प्रतिशत महिलाओं के बैंक खाते खुले। लेकिन महिलाओं का वित्तीय सेवाओं और वित्तीय साक्षरता में भगीदारी का स्तर बैंक खाते खुलवाने के प्रतिशत से बहुत कम है। 2017 में 43 प्रतिशत पुरुष डेविट कार्ड धारकों की तुलना में महिला का प्रतिशत 22 था।