वा स्कूल मा तीन आलू चार भाटा अउर एक किलो चावल से बनत है पचीस बच्चन का तहरी

sukhari purva  sakul photo taza pez copyजिला बांदा, ब्लाक नरैनी, ग्राम पंचायत नौगवां, मजरा सुखारी पुरवा। नरैनी से लगभग 15 किलो मीटर जंगल के बीच उंचाई मा बसा या पटेल जाति का सुखारी पुरवा के जाय खातिर लगभग 5 किलो मीटर खेत अउर जंगल से गुजर के पैदल रास्ता है। या गांव मा बने प्राथमिक विद्यालय के हालत तौ बाहर दरवाजे मा बंधे जानवर अउर मिड्डे मील से ही देखत बनत हैै कि केतनी अच्छी व्यवस्था है, पै या गांव मा न ही कउनौ अधिकारी के नजर परत न मीडिया के लोगन के।
गांव के प्रमोद, सुरेन्द्र अउर प्रहलाद कहिन कि गांव मा बने प्राथमिक विद्यालय मा मिड्डे मील के नाम मा रोज ही तहरी बनत है। जब कि मीनू अलग अलग दिन का बदल के बनै का चाही अउर बच्चन का पढ़ाई के नाम मा कुछ भी नहीं आवत आय नाम भर के खातिर तीन मास्टर हैं। रज्जू अउर लौलेश कहिन कि बिना बाउन्ड्री का या स्कूल दरवाजे जघा जघा खुदड़ा अउर गन्दगी से भरा नजर आवत है, पै कतौ नीकतान से सफाई नहीं कीन जात आय न खाना बनावैं खातिर स्कूल मा गैस के व्यवस्था आय। जब कि शिक्षा विभाग से हर स्कूलन मा गैस के व्यवस्था कीन जा चुकी है। खाना बनावैं वाली चुन्नी अउर रजोला कहिन कि गैस के बारे मा हम लोगन का पता निहाय। जब से खाना बनाइत हन तौ चूल्हा मा ही अपने घर से लकड़ी लइके बनाइत हैं। या छोट से रसोई घर मा रोत धुआ के बीच बइठ के दुई घंटा खाना बनावैं मा गुजारैं का परत है। हेडमास्टर रामदीन पाल कहिस कि किराना का समान खतम होइगा है, पै रोज मीनू से ही खाना बनत है। जब कि स्कूल के बच्चा अउर गांव के लोग या कहत रहैं कि रोज तहरी ही बनत है कतौ मीनू के हिसाब खाना नहीं बनत आय।