लोग पस्त, मस्त सरकार

editsaifउत्तर प्रदेश के इटावा जिले के सैफई गांव में एक हफ्ता खूब चहल पहल रही। यहां फिल्मी सितारों और नेताओं का जमघट लगा रहा। नाच-गाना भी हुआ। इधर महोत्सव शुरू हुआ उधर दिसंबर के आखिरी हफ्ते से मुजफ्फरनगर में दंगों का सामना करने वाले लोगों के कैंप उखाड़ने शुरू कर दिए गए। राशन भेजना तो शुरू अक्टूबर से ही बंद कर दिया गया था। जिन लोगों को मुआवज़ा नहीं मिला है। उन पर प्रशासन गांव लौटने का दबाव बना रहा है। इसका मतलब है कि प्रशासन और सरकार ये मान चुकी है कि बचे लोग कैंपों में नाज़ायज तरीके से रह रहे हैं। समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव खुद भी कह चुके हैं कि कैंपों में कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के लोग रह रहे हैं। महोत्सव में करीब 20 करोड़ रुपए खर्च हुए, ये खुद समाजवादी पार्टी ने बताया। वहां पहुंचे सलमान खान, माधुरी दीक्षित जैसे फिल्मी सितारों की फीस ही 5-7 करोड़ रुपए है। इसके अलावा और भी फिल्मी सितारे वहां पहुंचे थे। एक लाख की क्षमता वाले पंडाल में इंतजाम करने में कितना खर्च हुआ होगा इसका अनुमान आसानी से लगाया जा सकता है। महोत्सव खत्म होते ही पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां समेत बीस नेता दुनिया के पांच देशों की हवाई यात्रा में निकल पड़े। कारण पूछने पर बताया गया ये सभी अध्ययन के लिए दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जा रहे हैं। आजम खां का चुनावी क्षेत्र मुजफ्फरनगर है। गजब है कि मुजफ्फरनगर में दंगों का सामना करने वाले लोगों को पूरी तरह से बसाया नहीं जा सका। लेकिन महोत्सव और दुनिया की सैर में मुख्यमंत्री और सरकार के दूसरे मंत्री कैसे मस्त हो गए? जबकि राज्य सरकार के किसी भी मंत्री ने वहां का दौरा तक नहीं किया। प्रशासन के लोगों ने दंगे के बाद उन गांवों में जहां दंगे हुए थे, वहां जाकर माहौल के बारे में भी जानने की कोशिश नहीं की।