लेखक के.पी. सक्सेना नहीं रहे

लखनऊ। स्वदेश, लगान, हलचल और जोधा अकबर जैसी फिल्मों की कहानियां लिखने वाले व्यंगकार कालिका प्रसाद (के.पी.) सक्सेना की 31 अक्टूबर को मौत हो गई। काफी लंबे समय से ये कैंसर से जूझ रहे थे। तबियत बिगड़ने के कारण उन्हें लखनऊ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्होंने अब तक छोटे बड़े कुल मिलाकर पंद्रह हज़ार व्यंग्य लिखे हैं। नया गिरगिट, कोई पत्थर, मूंछ-मूंछ की बात, रहिमन की रेल यात्रा, रमइया तोर दुल्हिन, लखनवी ढंग से, बाप रे बाप, बावजूद खुल-खुल जाए।