राशन कार्ड के-अलग–अलग समस्या

गायत्री
गायत्री

जिला चित्रकूट, ब्लाक मऊ, गांव मैदाना। हिंया के रहैं वाली गायत्री बताइस कि मोर नाम गायत्री हवै मोरे मनसवा का मरै लगभग दुइ बरस होइगा हवै। मा रहत हौं। मैं बहुतै गरीब हौं मोरे चार बच्चा हवै। मोरे लगे लाल राशन कार्ड नहीं आय।
गायत्री कहत हवै कि पीला राशन कार्ड बना हवै। जेहिमा तेल भर मिलत हवै। लाल राशन कार्ड बन जाये तौ मोर अउर बच्चन का पेट चलै अबै तौ बनी मजूरी कइके पेट पालत हौं। कइयौ दरकी प्रधान जमुना से कहेव तौ कही देत हवै कि जबै राशन कार्ड बनिहैं तौ देखा जई। पता नहीं कबै राशन कार्ड बनिहैं अउर मोहिका भी सुविधा मिली। अबै तौ हिंया हुंवा काम का भटकट रहत हौं। पीला राशन कार्ड बना हवै अमीरी वाला। पता नहीं का सोच के सरकार गरीबन का अमीरी का राशन कार्ड बनवा देत हवै। जबै कि मैं झोपड़ी मा रहत हौं। तबहूं अमीर मा गिनती कीन जात हवै। पीले राशन कार्ड मा मिट्टी का तेल बस मिलत हवै। लाल बन जाये तौ कम से कम गेहूं चावल अउर चीनी मिलै लागै। जेहिसे मोर गरीबी कुछ कम होइ सकै।
जिला चित्रकूट, ब्लाक मानिकपुर, गांव भौंरी का लक्ष्मीपुरवा। हिंया के सुखिया दस बरस से अपने परिवार वालेन से अलग रहत हवै। वहिका अबै तक कउनौतान का राशन कार्ड नहीं बना आय। यहै से परेशान रहत हवै। यहिके खातिर कइयौ दरकी प्रधान रामेश्वर से कहा गा, पै वा सुनत नहीं आय।
प्रधान रामेश्वर का कहब हवै कि राशन कार्ड के फार्म भरे जइहैं तौ भरवा दीन जई। मोहिका खुदै चिंता लाग रकत हवैं।
सुखिया का कबह हवै कि दस बरस होइगे। अबै तक पीला राशन कार्ड तक नहीं बना आय। बाजार से खरीद के मिट्टी का तेल जलावत हौं। अगर राशन कार्ड बन जाये तौ गल्ला चीनी अउर मिट्टी का तेल मिलै लागै।