राज्य सरकार का अजीबो गरीब बयान – फसलों की बरबादी से नहीं मरे किसान

गीरे गेहुं के फसल
गीरे गेहुं के फसल

लखनऊ। राज्य विधान सभा में 27 मार्च को किसानों की आत्महत्या के मुद्दे पर दूसरे राजनीतिक दलों ने राज्य सरकार पर निशाना साधा। भाजपा के नेता ह्दय नारायण दीक्षित ने एक रिपोर्ट पेश की। इसमें इस बार बेमौसम बरसात से बरबाद फसलों के कारण अट्ठारह किसानों की आत्महत्या के आंकड़े दर्ज थे।
भाजपा समेत दूसरे राजनीतिक दलों ने कहा किसानों की आत्महत्या के मुद्दे पर राज्य सरकार गंभीर नहीं है। ह्दय नारायण दीक्षित ने बताया कि केवल उनके पैतृक निवास स्थान उन्नाव में ही छह किसानों ने आत्महत्या की है। उन्होंने यह भी कहा कि अभी तक बरबाद फसलों का सर्वे भी पूरा नहीं किया गया है। समाजवादी पार्टी के नेता अहमद हसन ने बताया कि इस साल बरबाद फसलों के कारण किसी किसान ने अपनी जान नहीं ली है। लेकिन भारी बरसात के कारण बिजली गिरने और घरों की छतें गिरने के कारण कुछ जाने ज़रूर गई हैं। उन्होंने कहा कि सरकार उन परिवारों को पांच लाख रुपए की मदद दे रही है जिनमें किसान की मौत इन कारणों से हुई है। उन्होंने केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र सरकार किसानों को लेकर बिल्कुल भी संवेदनशील नहीं है। केंद्र की तरफ से अब तक राज्य को किसानों की मदद के लिए कोई आर्थिक सहयोग नहीं मिला है।

कर्ज में डूबे किसान पूरे देश में आत्महत्या कर रहे हैं लेकिन राज्य की समाजवादी पार्टी के अनुसार बरबाद फसलों के कारण नहीं बल्कि बरसात में बिजली या फिर घर गिरने से किसान मर रहे हैं।