राजनीति नहीं खेती में नई सोच की जरूरत

 (फोटो साभार : डेविड मोनियौ | विकिपीडिया)
(फोटो साभार : डेविड मोनियौ | विकिपीडिया)

यह मौसम किसानों के लिए फसल बर्बादी का है। लेकिन दूसरी तरफ यह मौसम किसान रैलियोें का भी है। किसानों की राजनीति कर रही हर पार्टी इसके जरिए अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस पार्टी के राहुल गांधी ने बताया कि हमने किसानों का कर्ज माफ किया था। दुखी, बदहाल किसानों से मिलने उनके गांव तक गया। लेकिन यह नहीं बताया कि खेती के लिए उनके पास क्या कोई नई योजना है? आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल के पास यह बताने के लिए नहीं था कि उन्होंने किसानों के लिए क्या किया, तो उन्होेंने कांग्रेस और भाजपा पार्टी को कोसा। सत्ता में मौजूद प्रधानमंत्री मोदी तो किसानों से मन की बात करते वक्त अपनी भड़ास ही निकालते नजर आए।
सभी नेता बस मुआवजे और कर्ज माफी की राजनीति करके किसानों को बताए जा रहे हैं कि कौन बड़ा हितैषी है।
अगर नजर दौड़ाएं तो पूरी दुनिया में कई ऐसे माडल मिलेंगे जिनसे खेती को तरक्की मिली। इसका एक उदाहरण हमारे देश के केरल राज्य में ही मौजूद है। यहां एकजुट होकर खेती कर रही महिलाओं के अनुभव बताते हैं कि इनके लिए खेती मुनाफे का पेशा है। सरकार द्वारा चलाए जा रहे कुदुम्बश्री प्रोजेक्ट के जरिए इन महिलाओं को खेती में माहिर करने और उन्हें अर्थिक मदद देने का काम होता है। यह महिलाएं कर्ज ले सकें इसके लिए बैंक भी है। 1998 से चल रहे इस प्रोजेक्ट में एक भी ऐसी महिला नहीं है जिसने कर्ज न लौटाया हो। हमें ऐसे विकल्पों की तलाश करनी होगी जिससे हमें किसान पर तरस न खाना पड़े बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा सके।