यू.पी. की हलचल – रोज़गार का सपना क्या सच होगा?

सुमन गुप्ता
सुमन गुप्ता

सुमन गुप्ता उत्तर प्रदेश में वरिष्ठ पत्रकार हैं। वे फैज़ाबाद स्थित जन मोर्चा अखबार में काम करती हैं। इस समय वे यू.पी. स्तर पर पत्रकार हैं।

प्रदेश सरकार सूचना क्रांति यानि लोगों के भीतर सूचनाओं को पाने की चाहत को आधार बनाकर देश में रोजगार पैदा करने की तरफ कदम बढ़ा चुकी है। सरकार ने आई.टी. सेक्टर यानि सूचना एवं तकनीकी क्षेत्र में पांच हजार करोड़ रुपए के समझौते पर दस्तखत किए हैं। माना जा रहा है कि इससे राज्य में पंद्रह हज़ार लोगों को मोबाइल बनाने के काम में रोजगार मिलेगा।
तीन निजी मोबाइल कंपनियों लावा, सैमसंग और स्पाइस के साथ साझेदारी तय की है। कंपनियां प्रदेश में मोबाइल का निर्माण करेंगी। योजना कितनी सफल होगी कुछ नहीं कह सकते क्योंकि हर योजना की घोषणा एक सुहाने सपने की तरह होती है। ज़मीन तक आते आते न जाने उसके फायदे कहां गायब हो जाते हैं। लेकिन यह योजना अगर उसी रूप में लागू हो पाए जिस रूप में यह बनी है तो रोज़गार के साथ पलायन जैसी समस्या से निपटने का ज़रिया भी बन सकती है।
गांव और छोटे शहरों से काम की तलाश में बड़े शहरों में आने वाले लोग अपने ही इलाके में कमाई कर पाएंगे। शहरों का बोझ कम होगा गांवों में विकास को गति मिलेगी। इस क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं बहुत हैं। क्योंकि मोबाइल का इस्तेमाल बढ़ना ही है घटना नहीं। कंपनियां छोटे शहरों और गांवों की ओर आएंगी ही आएंगी। क्योंकि कम खर्च में ज़्यादा उत्पादन इन्हें यहीं मिलेगा। उधर लोगों के लिए यह कंपनियां रोज़ी रोटी का ज़रिया साबित होंगी। लेकिन लोग हर योजना की तरह ही इस योजना के भी जमीन पर उतरने को लेकर संदेह में हैं।
राज्य के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को चाहिए कि वह लोगों को भरोसा दिलाएं कि अबकी यह सपना सच में बदलेगा।