मोह लेती है मंजीरे की धुन

जिला बांदा। न ढोलक न बैन्जो सिर्फ मंजीरों की ताल से अनेकों सुर निकालते हैं बड़कू और छोटकू। लोग इस धुन को सुनकर दांतों तले अंगुली दबा के रह जाते हैं। क्योंकि सिर्फ मंजीरा से ताल निकालना कोई आसान बात नहीं। आइये हम आपको इन उस्तादों से मिलवाएं।

छोटकू और बड़कू बांदा जिला ब्लाक तिन्दवारी गांव खप्टिहा कलां के रहने वाले हैं। मंजीरे से ताल निकालना इन दोनों का बचपन से शौक था। इस शौक को अब इन दोनों ने अपना रोजगार बना लिया है। जहां भी जाते हंै अपनी छाप छोड़ आते हंै। बांदा जिला में मशहूर इन कलाकारों को लोग शादी विवाह जैसे अन्य अवसरों पर बुलाते हैं। इनकी उम्र चालिस पैंतालिस साल है और मंजीरे की धुन आज भी लोगों को पुरानी नहीं लगती और तुरंत उनका मन मोह लेती है।