महिला पत्रकारों की कलम से… – खुद को बचाया फिर अमेरिका में नाम कमाया

अलमास फातमी
अलमास फातमी

अब हर हफ्ते खबर लहरिया में पढ़ें महिला पत्रकारों की कुछ खास खबरें। राजनीति, विकास, संस्कृति, खेल आदि की ये खबरें देश के कोने-कोने से, छोटे-बड़े शहरों और अलग-अलग गांवों से हैं।
इस हफ्ते, बिहार के दानापुर से पढ़ें अलमास फातमी की खबर। पिछले करीब पांच सालों से पत्रकारिता कर रही हैं। वर्तमान में यह पटना में दैनिक हिंदुस्तान अखबार में रिपोर्टर हैं।

दानापुर, बिहार। यहां दानापुर के बिहटा कोरहर गांव की पूनम ने छोटी उम्र में एक बड़ा सपना देखा। यह सपना था ऊंची पढ़ाई का। यह सपना पूरा भी हुआ। मगर उसके लिए उसे साहस जुटाना पड़ा। पूनम के मां बाप भी गांव के दूसरे मां बाप से अलग नहीं थे। उन्हें पूनम की पढ़ाई नहीं बल्कि उसकी विदाई की चिंता थी। उन्होंने उसके बाल विवाह का पूरी तरह से मन बना लिया था। लाख मनाने के बावजूद पूनम के मां-बाप उसकी सुनने को तैयार नहीं थे। पूनम अपनी पढ़ाई की बात करती, तो वे कहते, तुम बड़ी हो गई हो, गांववाले क्या बोलेंगे? पढ़ाई आगे करने की बात पर तो बिल्कुल आग बबूला हो जाते थे।
पूनम ने चोरी-चुपके पैसा जमा करना शुरू किया। गांव के खेतों में मिट्टी काटने का काम कर उसने एक हजार रुपए इकट्ठा किए। वह नारी गुंजन प्रेरणा नाम के छात्रावास में पहुंची। बस यहीं से शुरू हो गई पूनम की ठप पड़ी पढ़ाई। 29 सिंतबर 2013 में वह इसी संस्था की ओर से बाल विवाह के खिलाफ आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने अमेरिका पहुंची।
पूनम ने बताया मैं जब अमेरिका से लौट कर आई, तो मेरे मां – बाप खुशी से फूले नहीं समा रहे थे। मेरे गांववाले अब अपनी बेटियों को स्कूल भेजने के बारे में सोचते हैं। मैंने सपना देखा था ऊंची पढ़ाई का लेकिन मैं हवाई जहाज में बैठकर अमेरिका जाऊंगी, ऐसा तो मैं सोच भी नहीं सकती थी। एक सौ बीस देशों के लोगों के सामने मैंने अपनी बात कही। मेरे हाथ पांव कांप रहे थे। मैं सबकुछ हिंदी में कह रही थी, वहां खड़ी एक लड़की सबकुछ अंग्रेजी में अनुवाद कर रही थी। जब मैंने बोलना बंद किया तो देखा पूरा हाल चुप था। सब मुझे देख रहे थे।