महिला पत्रकारों की कलम से… – महिला भिखारियों की सुरक्षा किसकी जिम्मेदारी?

डाक्टर स्मिता वशिष्ट
डाक्टर स्मिता वशिष्ट

अब हर हफ्ते खबर लहरिया में पढ़ें महिला पत्रकारों की कुछ खास खबरें। राजनीति, विकास, संस्कृति, खेल आदि की ये खबरें देश के कोने-कोने से, छोटे-बड़े शहरों और अलग-अलग गांवों से हैं। इस हफ्ते, डाक्टर स्मिता वशिष्ट से मिलें। ये हरिद्वार में पत्रकारिता की एसिसटेंट प्रोफेसर हैं। पिछले आठ सालों से पढ़ा रही हैं। पत्रकारिता से जुड़े शोध एवं प्रकाशन के काम को भी देखती हैं।

भारत में धर्म हमेशा से एक बड़ा मुद्दा रहा है। राजनीति हो या फिर व्यवसाय धर्म का बोलबाला है। कुछ जगहें तो बकायदा धर्म नगरी के नाम से पूरी दुनिया में पहचान बना चुकी हैं। इनमें से एक है, हरिद्वार। हर साल यहां लाखों पर्यटक आते हैं। ऐसा लगता है कि हर गली में मंदिरों की बस्ती बसाई गई हो। लाखों का चढ़ाव चढ़ने वाले इन मंदिरों के आसपास डेरा जमाए भिखारी खूब मिलेंगे। यह जानकर आपको अजीब लगेगा कि जैसे धर्म एक धंधा है वैसे ही भीख भी एक धंधा है। कौन, कहां, कितने समय के लिए भीख मांगेगा तय किया जाता है। भीख मांगने का मुद्दा क्या होगा। जैसे कोई औरत अपने भूखे बच्चे की कसम देकर भीख मांगेगी तो कोई महिला विधवा होने के नाम पर भीख मांगेगी। पुरुष भिखारी भी कम नहीं होते। मगर महिलाओं और बच्चों को इस धंधे में जल्दी काम मिलता है। दूसरे कामों की तरह यहां भी औरतों का जमकर शोषण होता है। इस धंधे को चला रहे लोग इनसे कमाई का अच्छा खासा हिस्सा इनसे वसूलते हैं। हरिद्वार के भारत माता मंदिर के सामने भीख मांगने वाली एक औरत ने बताया अपनी भीख का एक मोटा हिस्सा हम अपने साहबों को देते हैं। साहब यानी इस धंधे को चलाने वाला प्रमुख व्यक्ति। वह हमें इसके बदले सुरक्षा की गारंटी देते हैं। मैंने पूछा फिर तो आप सुरक्षित महसूस करती होंगी। कोई छेड़छाड़ या मारपीट नहीं होती होगी। इसके जवाब में उस महिला भिखारी के साथ दूसरी भिखारिनों ने भी कहा कि नहीं बाहर का तो कोई नहीं कर सकता। मैंने पूछा और अंदर का? इस जवाब मिला, बाहर से सुरक्षित रहना है तो अंदर वालों को सहना पड़ेगा। अगर उन्हें न कहेंगे तो हमारा ठिकाना कहां लगेगा? फिर मैंने पूछा सरकार कोई सुविधा देती है? उस औरत ने मेरी तरफ ऐसे घूरा मानों मैंने यह सवाल पूछकर गुनाह कर दिया हो। तब से रह रहकर यह सवाल उठता है, मेरे मन में कि देशी विदेशी महिला पर्यटकों या यहां रहने वाली औरतों की सुरक्षा का जिक्र जब तब सामने आता रहता है, मगर इन औरतों का जिक्र कभी नहीं सुना। यह किसकी जिम्मेदारी हैं?