मथुरा में हिंसा, आगजनी और फायरिंग के बाद ‘राजनीति शुरू’

Mathura-PTI-copy-w“गांव में चक रोड नहीं है। घर के आगे से निकलने को रास्ता तक नहीं मिलता। मेरे घर के गेट के सामने जमीन पर कब्जा कर लिया गया। अधिकारी सुनते नहीं, पुलिस कार्यवाई नहीं करती। आखिर हमें हक नहीं मिलेगा तो क्या करेंगे। बड़ों से लेकर बच्चों तक के पास काम नहीं है। गन्ना मिल में काम करने के दस साल बाद भी पैसा नहीं मिला। मेरे लिए तो यह आंदोलन ही एकमात्र विकल्प है। इसलिए सिस्टम से बगावत की।”
यह दर्द है जवाहर बाग में घायल हुए कई लोगों में से एक कुशीनगर निवासी 68 वर्षीय दयाशंकर का है। मथुरा के जवाहर बाग में दयाशंकर भी गंभीर घायल हुआ है। उसे एसएन इमरजेंसी में भर्ती कराया गया है।
इसी के चलते मथुरा के जवाहर बाग से अवैध कब्जाधारियों को हटाने पहुंची पुलिस पर अंधाधुंध फायरिंग और बमबारी हुई। जिसमें एसपी सिटी और एसओ शहीद हुए। कई पुलिस कर्मी गोली लगने से घायल हो गए। आगजनी की घटना हुई। कई राउंड फायरिंग की गई। इस हिंसा में पुलिस अधीक्षक मुकुल द्विवेदी, एसओ संतोष कुमार सहित एक अन्य व्यक्ति की मौत हो गई।
कैसे हुई शुरुआत
सत्याग्रही संगठन का प्रमुख रामवृक्ष सिंह यादव 18 अप्रैल, 2014 को मध्यप्रदेश के सागर जिले से अपने साथियों के साथ मथुरा पहुंचा था।
सभी यहां जवाहर बाग में आराम करने के इरादे से रुके और फिर हमेशा के लिए यहीं के होकर रह गए। मथुरा इस संगठन की कारगुजारियों के चलते पिछले 2 सालों से बेहाल था। पुलिस प्रशासन की लापरवाही के चलते यादव और उसके साथियों का दुस्साहस बढ़ता गया।
किसी को नहीं छोड़ा
सत्याग्रही संगठन के सदस्य लगातार हिंसा कर रहे थे। उन्होंने आम आदमी से लेकर अफसरों तक किसी को भी नहीं छोड़ा। उनका कई बार पुलिस, उद्यान विभाग और कलेक्ट्रेट कर्मचारियों से विवाद हुआ। बावजूद इसके कोई उनका बाल भी बांका नहीं कर सका। बीते चार अप्रैल को उपद्रवियों ने लेखपाल, वकील और तहसील कर्मियों के साथ कलेक्ट्रेट परिसर में मारपीट की थी। इस संबंध में यादव सहित 250 लोगों के खिलाफ सदर बाजार थाने में केस दर्ज कराया गया था।
कौन है रामवृक्ष यादव
बाबा जय गुरुदेव की मौत के बाद उनकी विरासत को लेकर पंकज यादव और रामवृक्ष यादव के बीच विवाद चल रहा था। सत्याग्रही संगठन का लीडर रामवृक्ष ही था। वो मूल रूप से गाजीपुर के मुरगढ़ जिले के रामपुर का रहने वाला था। यह फायरिंग के दौरान मारा गया।
लेकिन अब इस हिंसा ने राजनीति का रूप ले लिया है। इसे लेकर भाजपा ने प्रदेश सरकार पर आरोप लगाए। जवाहर बाग कांड की सीबीआई जांच कराने की मांग को लेकर भाजपा की नगर इकाई ने विधानसभा के सामने प्रदर्शन किया। नाराज कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। अब देखना यही है कि भाजपा इसे 2017 के चुनावों के लिए कैसे भुनाती है।