मजदूरी के दिन ओर दाम बढ़ाये सरकार

महोबा जिला के एसे केऊ गांव हे जिते के ज्यादातर आदमी अपने परिवार खा लेके बाहर कमायें जाये खां मजबूर हें। रोजगार गारंन्टी योजना लागू होय के बाद भी प्रधान आदमियन खा काम नई देत हे। अगर काम मिलत हे तो मजदूरी को रूपइया नई मिलत आय।
जेसे कबरई ब्लाक के डढ़हटमाफ गांव के सत्तर आदमियन ने एक महीना नहर की खुदाई ओर सफाई जून 2013 में करी हती। जिसकी मजदूरी नहीं मिली हें। सोचे वाली बात तो जा हे कि मजदूर आदमी अगर मजदूरी के भरोसे हे। मेहनत करके आपन परिवार पालत हे तो ऊखे साथे एसो काय करो जात हे। सरकार खा एक बारी जा भी सोचे खा चाही की अगर काम करो हे तो ऊ रूपइया कहां गओ। का धिकारियन को सरकारी वेतन से आपन खर्च नई चलत हे। चरखारी ब्लाक के ऐंचाना गांव में लगभग पचासन ओरत खा ऊ साल से काम नई मिलो हे जीसे 1 अक्टूबर 2013 खा तहसील दिवस में दरखास दई हे। सवाल तो जा उठत हे कि तीन सौ पैसठ दिन में सौ दिन की मजदूरी से आदमी को भरण पोषण नई हो पाउत हे। ओर ऊ भी नई मिलत हे, तो का होत हे योजना खा बनाये। सरकार खा काम के दिन बढ़ा के महगांई के हिसाब से मजदूरी भी बढ़ाये खा चाही।
उत्तर प्रदेश के गांव में लगभग 70 प्रतिशत जनता गांव में रहत हे जभे की केन्द्र सरकार ने महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना चलाई हे कि गांव को आदमी बाहर कमायें न जाये अधिकारिन खा योजना के बाद देखे खा चाही कि ऊ योजना को लाभ कित्ते आदमियन न खा मिलत हे। अगर नई मिलत तो अपने अपने अधिकारिन से जवाब पूछे खा चाही?