भेदभाव के दलदल में आज भी फंसे दलित

(फोटो साभार: हिन्दुस्तान टाइम्ज़)
(फोटो साभार: हिन्दुस्तान टाइम्ज़)

देश को आज़ाद हुए करीब सत्तर साल बीत चुके हैं मगर दलित भेदभाव और छुआछूत से आज भी आजाद नहीं हैं। हाल ही की कुछ घटनाओं को देख लें – मध्य प्रदेश में एक लड़की की पिटाई केवल इसलिए कर दी गई क्योंकि उसकी परछाईं एक ऊंची समझी जाने वाली जाति के एक व्यक्ति पर पड़ गई थी। मध्य प्रदेश के ही एक गांव में दलित सरपंच को 15 अगस्त के दिन झंडा फहराने से मना कर दिया जाता था। इसी राज्य में दलित जाति का दूल्हा हैलमेट लगाकर बारात में गया। कारण था कि दलित जाति के लोगों को घोड़ी चढ़ने की मनाही है। इसलिए प्रशासन ने पूरी सुरक्षा के साथ उसकी बारात तो निकाली मगर कहा कि हेलमेट लगाकर जाएं जिससे अगर कोई मारने का प्रयास करे तो बचाव हो सके।

प्रतापगढ़ की घटना में एक दलित के घर पर लोगों ने पथराव किया। कारण इस घर के दो लड़कों का आई.आई.टी. परीक्षा में पास होना था। परिवार के लोगों ने बताया कि अगर दलित जाति के लड़के लड़कियां ज्यादा पढ़ते हैं तो उनके साथ यही बर्ताव किया जाता है।

आज भी हमारे देश में बहुत कम दलित परिवार हैं जिनके बच्चे आई आई टी जैसी मशहूर इंजीनियरिंग की संस्था तक पहुंच पाते हैं। जहां दलित बच्चे स्कूली शिक्षा भी मुश्किल से पूरी कर पाते हैं वहां प्रतापगढ़ के इन दो लड़कों का आई आई टी तक पहुंचना बड़ी उपलब्धी है। सत्ताधारी समाज को यह स्वीकृत नहीं था। सदियों से शिक्षा और रोजगार में अपनी धाक जमाने का मिला मौका कुछ कमजोर होते हुए दिखा। इस वजह से यह हमला हुआ।

समाज के लिए शर्मनाक घटना है। ऐसे में प्रशासन का सख्त होना के साथ ही सामाजिक और राजनीतिक तौर पर दलितों को मजबूत बनाने की जरूरत है।