भूमि अधिग्रहण बिल संसद में पास

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नई दिल्ली। संसद में भूमि अधिग्रहण विधेयक को मंजूरी मिल गई है। यह विधेयक 1894 से चले आ रहे पुराने भूमि अधिग्रहण कानून की जगह लेगा। हालांकि विपक्ष इसे चुनावों की हड़बड़ी में लाया गया विधेयक बता रही है।
विधेयक में क्या है?
ग्रामीण इलाकों में जमीन के बाजार मूल्य का चार गुना और शहरी इलाकों में दो गुना मुआवजा मिलेगा।
उपजाऊ भूमि के अधिग्रहण के बारे में फैसला लेने का अधिकार राज्यों को होगा। पांच साल तक अगर अधिग्रहित जमीन का प्रयोग नहीं होगा तो वह सरकारी बैंकों के हिस्से में चली जाएगी।

क्यों हो रहा है विरोध ?

पांच साल तक ज़मीन का उपयोग न होने पर ज़मीन बैंकों के पास न जाकर ज़मीन के मालिक, किसानों को वापस मिलनी चाहिए।
केवल बंजर भूमि का ही अधिग्रहण होना चाहिए। उपजाऊ भूमि के अधिग्रहण का अधिकार राज्यों को देने से दुरुपयोग होगा, जैसा नियमगिरी में उड़ीसा सरकार ने खनन के मामले में करने का प्रयास किया था।
लघु किसानों और आदिवासियों के पुनर्वास के बारे में कुछ नहीं कहता ये विधेय