बिजली करै गांव शहर मा भेदभाव

DSCN254719 फरवरी से बोर्ड परीक्षा शुरू है, पै बिजली कटौती के कारन ग्रामीण छात्र छात्रा परीक्षा के तैयारी नींक से न कई पइहैं। हर साल बोर्ड परीक्षा आवत है, पै विभाग परीक्षा दें वाले छात्रन का जरूरत भर बिजली दें का इंतजाम काहे नहीं करत आय?छात्र अनियमित कटौती से बेहद परेशान हैं।
खबर लहरिया कइत से कीन गा बांदा चित्रकूट जिला के दस गांव का सर्वे जमीनी हकीकत का देखावत है। उत्तर प्रदेश राज्य का पिछड़ा इलाका बुन्देलखण्ड अउर बुन्देलखण्ड का पिछड़ा इलाका ग्रामीण अउर जंगली क्षेत्र मा बिजली कटौती अउर बिजली का न होब कउनौ नई बात न होय। पै परीक्षा या फेर कउनौ खास अवसर मा पिछड़े इलाका का विशेष ध्यान दीन जाय का चाही। जहां एक कइत सरकार बड़े-बड़े राज्य अउर शहरन मा चैबिस घण्टा बिजली दइके कमाई करत है, होंआ पढ़ई जइसे जरूरी काम का ध्यान काहे नहीं देत आय?
सरकार जरूरी कामन का ध्यान जरूर देत है। जहां सरकार का भारी भरकम मुनाफा होत है। जइसे बड़े-बडे़ कम्पनी का चैबिस घण्टा बिजली तौ देत ही है। ऊपर से कम्पनी के काम खातिर भी बिजली देत है।
दिल्ली, मुम्बई, आगरा जइसे के महानगरन मा एक बल्ब के जरूरत के जघा दस बल्ब जला के बिजली का फिजूल खर्च कीन जात है, पै गांवन मा जरूरी अउर हित वाले काम खातिर कटौती काहे कीन जात है। बिजली कटौती कइके सरकार गांव अउर शहर के साथै भेदभाव करत है। जबैकि चुनावी प्रचार प्रसार के मैदान मा गांवन का भी शहर मा बराबर बिजली दें का वादा करत है। या समय चित्रकूट अउर बांदा जिला मा समाजवादी पार्टी बिजली दें मा सफल होय का ढिढ़ोरा पीटत है, पै हकीकत कोहू से छिपी निहाय।