बाल मजदूरी, एक सामाजिक पाप, चित्रकूट जिले के राजापुर कस्बे के बच्चों की भी यही कहानी

जिला चित्रकूट, ब्लाक रामनगर, गांव रम्पुरिया म ड़इन के जिन्दगी मा बचपन से बहुतै नाजुक हिस्सा होत हवै। बचपन मा मड़ई के जिन्दगी बहुतै सादी अउर सरल होत हवै।  खेले कूदे अउर पढ़े लिखे के आलावा कुछौ काम नहीं होत आय। पै रम्पुरिया पतेर गांव के बच्चन का जीवन अंधेरा मा हवै जउन हांथ मा किताब होवे का चाही वा हांथ मा कूड़ा से भरी थैली होत हवै।जिला चित्रकूट, ब्लाक रामनगर, गांव रम्पुरिया म ड़इन के जिन्दगी मा बचपन से बहुतै नाजुक हिस्सा होत हवै। बचपन मा मड़ई के जिन्दगी बहुतै सादी अउर सरल होत हवै।  खेले कूदे अउर पढ़े लिखे के आलावा कुछौ काम नहीं होत आय। पै रम्पुरिया पतेर गांव के बच्चन का जीवन अंधेरा मा हवै जउन हांथ मा किताब होवे का चाही वा हांथ मा कूड़ा से भरी थैली होत हवै। सेव द चिल्ड्रेन के रिपोर्टर के हिसाब से उत्तर प्रदेश,महाराष्ट्र,मध्यप्रदेश,बिहार अउर राजस्थान मा सबसे ज्यादा बाल मजदूर हवै। कैम्पन अगेंस्ट चाइल्ड के हिसाब से भारत मा अबै भी एक करोड़ छब्बीस लाख छाछठ हजार तीन सौ सत्ततर बाल मजदूर हवै। यहिसे या पता चलत हवै कि बच्चन के जिन्दगी अबै भी खतरा मा हवै। बाल मजदूर राम करन बताइस कि मोर उमर दस साल हवै। हमार बाप कुछौ काम नहीं करत आहीं। यहै कारन मैं कबाड़ बीने का काम करत हौं। रोज 2 से 3 सौ रुपिया कमा लेत हौं। किसन बताइस कि मोर बाप दारू पियत हवै घर का खर्चा चलावे वाला कोउ नहीं आय।यहै कारन मै कबाड़ बीन के घर का खर्चा चलावत हौं। रोज सौ दुई सौ रुपिया कमा लेत हौ। काश्मीर बताइस की पढ़े खातिर रुपिया नहीं आय।यहै कारन कबाड़ बीनत हौं। कश्मीर के महतारी सुनीता देवी बताइस कि काश्मीर जउन रुपिया लावत हवै वहिमा से दाल चावल आटा सब्जी आ जात हवै।पढ़ाई खातिर रुपिया नहीं बचत आय। श्रम प्रवर्तन अधिकारी रवी शुक्ला बताइस कि होटल ढाबा मा छापा मार के बाल मजदूरन का ढूढ़ा जात हवै। फेर बच्चन का एड़मीशन करावा जात है। नियम के हिसाब से कारवाही कीन जात हवै।

रिपोर्टर- सहोद्रा

19/06/2017 को प्रकाशित