बाप भी न सोचे बिटिया को भविष्य

सुनीता
सुनीता

जिला महोबा, ब्लाक कबरई, गांव सुकौरा। एते की रहें वाली सुनीता खे शादी दस साल पेहले बांदा जिला के गहबरा गांव में भई हती। ससुराल वाले शादी के बाद ऊखा नीक न होय ओर बीमारी को बहाना कर खे छोड़ दओ हतो। अब ऊ छह साल से मायके में रहत हे।
सुनीता बताउत हे कि मोई मताई बचपन में मर गई हती। हम दो बेहन ओर तीन भाई हें। मोओ आदमी संतोष ने दूसर शादी कर लई हे। जभे मोये बाप भाई कछू नई सोचत हें तो में अकेले किते जेहों। एई से बाप भाइन खे साथे काम करत हों, ओर घर में रहत हों। ससुराल से कोनऊ सहारा नइयां। गांव में इत्ते दिनन से रहत हो गये हें, पे प्रधान मोओ पहचान पत्र ओर राशन कार्ड़ नई बनाउत आय। कि आगे खा कछू सहारा हो जाय। जभे तक कमात हों तभे तक बाप भाई भी कमाई खे लाने साथ देत हें, पे इत्ती बड़ी जिन्दगी खा कोनऊ नई सोचत आय। में कहत हों कि अगर प्रधान राशन काडऱ् ओर पहचान पत्र बना देय तो मोई जिन्दगी खा आसरा हो जेहे।
प्रधान इन्द्रपाल कहत हें कि वोटर लिस्ट में नाम आये खे बाद पहचान पत्र बनत हे। बाद में कोनऊ सरकारी लाभ मिलत हे। अगर ऊखा नाम वोटर लिस्ट में होहे तो पहचान पत्र ओर राशन काडऱ् बनवा दओ जहे।