बाढ़ से उत्तराखंड तहस नहस

caritas 1
साभार- कारितास इंडिया

उत्तर भारत के उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश राज्यों में 14 जून से हो रही बारिश ने पूरे इलाके को तहस नहस कर दिया है। करीब 1000 लाशें मिली हैं और साठ हज़ार लोग अभी बाढ़ में फंसे हुए हैं। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है की मरने वालों की संख्या पचास हज़ार तक पहुंच सकती है। हर साल इस इलाके में बाढ़ आने की संभावना होती है क्योंकि हिमाजय से बर्फ पिघलकर नदियों के स्तर और रफ्तार को बढ़ा देती है। लेकिन इस साल मानसून के जल्दी आने से कोई भी इस गंभीर बाढ़ के लिए तैयार नहीं था। ये बाढ़ जो आज उत्तर भारत को निगल रहा है उसका कारण प्रकृतिक ही नहीं बल्कि इंसानों के के द्वारा ज़मीन का
अंधाधुंध इस्तेमाल भी है
उत्तराखंड सरकार अभी फंसे हुए यात्रियों को बचाने की कोशिश में लगी हुई है। जब पानी ढलेगा तभी पूरी बर्बादी का अनुमान लगा सकेंगे। अब भी कई लाशें मलबे दबी हुई हैं। एक तरफ यात्रियों को बचाने का काम जारी है और दूसरी ओर निवासियों के पुनर्वास के लिए मलबे हटाने का काम हो रहा है। मुआवज़े के तौर पर कुछ लोगों को मामूली रकम दी गई है।

बाढ़ के कारण
-नदी की मिट्टी और पत्थरों को निकाल निकाल कर उन्हें बेचा जा रहा है और इससे नदी की प्राकृतिक बनावट पर गहरा असर पड़ रहा है।
-नदी के किनारे बाढ़ का खतरा हर साल रहता है फिर भी इन इलाकों में इमारतों को बनाने में रोक नहीं की जाती क्योंकि ये पर्यटन को बढ़ावा देती है। ये इमारतें नदी के किनारे की भूमि को ढीला कर देती हैं जिससे बाढ़ आने से आराम से बह जाती है।
-यात्रियों के लिए हर साल पहाड़ को तोड़ कर नई सड़कें बनाई जा रही हैं और सडकों को चैड़ा किया जा रहा है। इससे जब ऊपर से पानी तेज़ रफ्तार में आता है तो ढीली मिट्टी बह कर सडकों को भी अपने साथ बहा ले जाती हैं।