बांदा जिले में 1 साल से दलित बस्ती के हैंडपंप की मरम्मत करने वाला नहीं है कोई

नांददेव भांता गांव के बीच हिंया एक साल से या बस्ती का हैंडपंप खराब है। या हैंडपंप एक साल पहिले बीडीओ रिबोर खातिर डारिन रहै। आज वा एक महिना पहिले रिबोर पास होइके आवा है। हिंया रिबोर नहीं होय देत आय। जउन मड़इ के दुआरे मा हैंडपंप लाग है वहिका नाम पंक्षी कृपाल प्रजापति है। वहिका कहब है कि या हैंडपंप दूसरें के लगे न जई। न तौ लागै देत आय अउर न तौ जघा देत आय।

राजकुमारी का कहब है कि भूते दिन से खराब पड़ा है। गुड्डन बताइस है कि हुंवा नहाये नहीं देत आय। जानवरन का पानी अउर अपने का पियें का पानी लागत है। सबै काम मा तौ पानी लागत है। रीना बताइस है कि सुखबीर के नल से पानी लइत है। सुखबीर का मना कीन जात है कि कउनौ मड़इन पानी न लई जायें पावै। पानी होइने से लइत है। बहुते दूर है चार डिब्बा पानी लावै मा हाथन मा छलका अउर कटें के निशान पड़ जात है। या हिंया न लागी तौ मैं तौ चाहत हौं कि न लागै। एक दरकी मड़इ का अपमान होई जाय तौ वहिका सोंचे का चाहीं। या हैंडपंप अइसे जघा मा लागै कि जहां से हमहूँ चार बाल्टी पानी ला सकीं। मोर लावा आय अउर मैं बोर किन्हें हौं मैं यहिका अइसी जघा मा न लागै देहूं, जहां से चार बाल्टी पानी न ला सकौ।  संतोष सिंह प्रधान का कहब है कि यहै परेशानी है कि वा काम नहीं होय देत आय। मैं बीडीओ अउर एडीओ पंचायत से कहे हौं कि या हैंडपंप दूसर जघा लागवा दीन जाय। एसडीएम साहब से कहे हौं तौ सबै अधिकारी कहिन हैं कि या हैंडपंप दूसर जघा लागी, पै वहिकर मेहरिया हैंडपंप का खोलै नहीं देत आय। खंड विकास अधिकारी विजेंद्र कुमार प्रजापति का कहब है कि कारन यहै है कि वा कहत है कि या हैंडपंप दूसर जघा न लागी। हम रिबोर के खातिर मिस्त्री भेज रहे हौं तौ वा हैंडपंप का खोलै नहीं दिहिस मिस्त्री का वापस भेज दिहिस है। प्रधान जी गे रहै, है तौ सबै मड़इ कहत कि हैंडपंप लागी तौ हेइने लागी नहीं तौ कहूं न लागी। रिबोर का नियम है कि आठ दस मीटर दूरी हैंडपंप लागत है। यहै कारन इनतान के स्थिति है, यहै से काम नहीं होय देत आय अउर झगड़ा करत है।

रिपोर्टर: शिवदेवी

Published on Apr 30, 2018