बर्तन बनाये खे नई मिलत माटी

103जिला महोबा, ब्लाक चरखारी, कस्बा खरेला। एते जालिब मोहल्ला वार्ड नम्बर तीन के रहें वाले लगभग दस कुम्हारन खे बर्तन बनायें खें लाने माटी नई मिलत हे, जीसे ऊ बोहतई परेशानी झेलत हें।
दिबिया, दुर्जन, हल्के ओर मुल्लू कुम्हार बताउत हें कि जा बर्तन बनायें खे धन्धा हमाये पुरखन से चलत आओ हे। सत्तर साल की रावरानी ने बताओ कि में बर्तन बनायें खें काम चालिस साल से करत हों। एक साल में लगभग पांच सो बर्तन बना लेत हों। जीसे मोये परिवार खे भरण पोषण होत हे, पे अब माटी नई मिलत हे। काये से पांच सौ बर्तन बनाये खे लाने एक ट्राली माटी लागत हे। पेहले श्रंगी ऋषि तालाब से माटी ले आउत हते, पे जभे से ऊमें बड़ो नाला गिरा दओ हे। तभे से ऊमें पानी भरो रहत हे। एई से हम बर्तन बनाये खें लाने चार किलोमीटर दूर दूसर गांव पहरेता से माटी लाउत हंे। अब ओते के प्रधान ने भी मना कर दओ हे, कि अब में माटी न ले जान देहों। एई से हम सोचत हें कि ई साल बर्तन केसे बनहें ओर हमाओे गुजारा केसे होहे। काये से बर्तन बनायें खे अलावा हमाये एते ओर कोनऊ धन्धा नइयंा। हमने मटकड़ा के लाने केऊ दइया चेयरमैन से कहो हे, पे ऊने कोनऊ ध्यान नई दओ आय।
खरेला नगर पालिका के चेयरमैन सिद्ध गोपाल ने बताओ कि ईखे बारे में मोये कछु जानकारी नइयां।