बच्चा के भविष्य से न करू खेलवार

शिक्षा जीवन जीये के एगो बेहतर कला हई जेकरो बिना समाज के परिवर्तन न हो सकई छई। शिक्षा ही एगो शिक्षित व्यक्ति, परिवार, समाज चाहे राष्ट्र के बनवई छई।
पहिले जब विद्यालय न रहलई त बच्चा गुरूकुल में पढ़े जाईत रहलथिनह। लेकिन अभी एकर व्यवस्था सरकार कर रहल छथिन। लेकिन जेतना अनुशासन पहिले रहलइय कि अब ओतना रह गेल हई? एकर देख रेख करे के लेल सरकार विद्यालय शिक्षा समिति के गठन कयल गेलई। जेकरा विद्यालय के व्यवस्था, शिक्षा के गुणवत्ता, मध्याह्न भोजन, शिक्षक के उपस्थिति इत्यादी देखे के हई। अई के लेल उनका हर महिना बैठक करे के हई। जेकर रिपोर्ट ब्लौक में जमा करे के हई। लेकिन की इ विद्यालय में हो रहल हई? इहां तक की सदस्य के इहो पता न रहई छई कि हम अपना समिति में केतना सदस्य छी। जे एई समिति के मुह चिढ़ा रहल हई। बस रजिस्टर में एकर खानापुर्ति कयल जाई छई। जइसे केथरिया मध्य विद्यालय के देख के एकर अंदाजा लगायल जा सकई छई। की विद्यालय के व्यवस्था कइसन हई। एकरा सक्रिय करे सरकार न अइथिन बल्की गांव के लोग के ही जागरूक होय के होतई। गांव में उनकर ही बच्चा पढ़ई छई । उनका उचित व्यवस्था न रहतई त उनकर ही बच्चा के भविष्य खराब होतई। लेकिन महज कुछ लालच के चलते सारा व्यवस्था के ही नजरअंदाज करई छथिन।