पेट का सवाल, फेर भी बंदरबाट

चित्रकूट अउर बांदा जिला मा या समय राषन कार्ड बनैं का लइके बहुतै मारा मारी है। आर्थिक गणना के लिस्ट मा अमीरी अउर गरीबी रेखा के हिसाब से नाम चढ़ावैं मा बहुतै गड़बड़ी है। आर्थिक गणना सर्वे लिस्ट जबै से आॅनलाइन आई है वहिके बाद से गरीबन जनता के बीच मा हडकम्प मचा है। जनता लिस्ट के सुधारै के मांग गांव से लइके जिला के अधिकारिन तक का दरबाजा खटखटावत है, पै उनके समस्या हल करैं का कउनौ आसरा नहीं देखात है। काहे से आपत्ति करैं के अंतिम तारीख 20 फरवरी रहै जउन निकल चुकी है। काहे से बहुतै गांव के मड़ई आपत्ति नहीं कई पाइन। दूनौ जिला के जनता लिस्ट देख के दुखी है कि अब उनका राशन कार्ड न बन पइहैं। अमीरी रेखा मा नाम षामिल होय के बाद राषन कार्ड मा मिलै वाला सस्ता राषन अब न मिल पाई।
rashanभारत सरकार 2013 मा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम नाम से कानून लागू करिस है जेहिके माध्यम से भारत सरकार खाद्य सुरक्षा का ध्यान मा रख के गरीब लोगन का सस्ते दाम मा अनाज दें का दावा करिस रहै जेहिसे गरीब जनता का पोषण के सुरक्षा मिलै अउर उंई भी सम्मान के साथै जीवन यापन कई सकैं। या खाद्य सुरक्षा शहरी क्षेत्रन मा पचास प्रतिषत अउर ग्रामीण क्षेत्र मा पछहत्तर प्रतिषत के छूट के दर मा अनाज दीन जई। जेहिमा हर परिवार दुई से तीन रुपिया किलो के हिसाब से अनाज दीन जई। या योजना तौ बहुतै नींक अउर सराहनीय है, पै यहिसे मिलै वाला लाभ सराहनीय निहाय। केन्द्र से आवत आवत जिला तक मा योजना से मिलै वाला लाभ बडे अधिकारी से लइके छोट करमचारी तक मा बन्दरबाट कई लीन जात है।
कइयौतान के योजना का फइलावैं का सिलसिला जारी है, पै समेटैं के गति बहुतै धीमी है।