पिता के विश्वास ने विश्व कप तक पहुंचायाः पूनम यादव

साभार: विसडेन इण्डिया
साभार: विसडेन इण्डिया

पूनम यादव ने उत्तर प्रदेश में 2009-10 तक इंटर स्टेट टीम के लिए खेला। वह इससे खुश नही थीं और इसको छोड़ने के लिए उन्होंने अपना निर्णय एक पत्र में लिख पिता को बताना चाहा। लेकिन यह पत्र उन्हें दे नहीं पायी और वो गुम हो गया। एक साल बाद उनकी भाभी को वो कागज का टुकड़ा मिला और उसे पूनम के पिता को सौंप दिया। और यहीं से पूनम की जिन्दगी ने नया मोड़ लिया।
पूनम इस बात को याद करते हुए कहती हैं कि मेरे पिता ने पत्र पढ़ कर मेरा हौसला बढ़ाया। मेरे पिता ने ही मेरा सबसे ज्यादा साथ दिया।
पूनम हनुमान की भक्त हैं और माथे पर उनका नारंगी टीका लगाना नहीं भूलतीं। वो कहती हैं, ‘मैं भगवान में दृढ़ विश्वास रखती हूं और अपने अच्छे प्रदर्शन के लिए उनका आशीर्वाद मांगती हूं’।
उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पल वो था जब पूनम हेमलता कला, नीतू डेविड और प्रीति डिमरी जैसी पूर्व भारतीय क्रिकेटरों के साथ आगरा के एकलव्य स्पोर्ट्स स्टेडियम में प्रशिक्षण लेने लगीं। इस बात से तो पूनम के माता पिता को भी राहत मिली क्योंकि वे चिंतित हुआ करते थे की उत्तर प्रदेश जैसे रूढि़वादी राज्य में लोग उसके साहस को गलत समझा करते थे।
पूनम टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में भारत की अग्रणी गेंदबाजों में से एक है। वह भारतीय गेंदबाज झूलन गोस्वामी के रिकॉर्ड से 2 कदम की दूरी पर हैं।
पूनम अपने पहले मैच से अब तक बांग्लादेश के खिलाफ खेले गए मैचों में 14 मैचों में शामिल रहीं जिसमें उन्होंने 24 विकेट लिए।
पूनम विश्व कप जीतना चाहती हैं और इस साल के महिला विश्व टी-20 टीम में शामिल होकर पूनम बहुत खुश है। पूनम कहती हैं, ‘‘हमारी टीम का संयोजन बहुत अच्छा है, हम एक दूसरे की मदद और एक दूसरे का हमेशा सहयोग करते हैं। इस बार जो भी हो जाए, हम इस विश्व कप ट्रोफी को लेकर रहेंगे।’’
क्रिकेट के अलावा पूनम डायरी भी लिखना पसंद करती हैं। वो हर मैच के बाद उसकी अच्छी और बुरी बात अपनी डायरी में लिखती हैं और बाद मैं उससे सीखने की कोशिश करती हैं।
पूनम आशा करती हैं कि इस बार वो पिता को पत्र लिख सकें कि वो विश्व कप जीत गयी हैं।

लेख साभार: विसडेन इण्डिया