पानी के टैंकर केहिके खातिर

चित्रकूट अउर बांदा जिला मा या समय पानी के हाहा कार मची हवै।यहिसे मड़इन का पियै खातिर पानी के व्यवस्था सरकार कइती से टैंकर के जरिया से कीन जा रही हवै। सरकार आपन खाना पूर्ति तौ करै मा लाग हवै, पै या नहीं देखत आय कि कउन मड़ई अउर कउन बस्ती मा पानी के टैंकर जात हवैं। का दलित अउर गरीब मड़इन का इं टैंकरन से पानी मिल पावत हवै? कहैं खातिर तौ सरकार चित्रकूट जिला मा या समय 62 पानी के टैंकरन के व्यवस्था कीने हवै।
ज्यादातर इं टैंकरन से उच्च जाति के अउर दबदबा देखावैं वाले मड़ई पानी भर पावत हवैं। यहिके बाद अगर टैंकर मा पानी बचत हवै तौ बचा कुछा पानी दलित बस्ती मा जात हवै। यहिनतान बांदा जिला मा भी पानी के टैंकरन के यहै हालत हवै। जिलन मा पानी तौ या समय गर्मी परैं के कारन शर्बत जइसे का काम करत हवै।
जइसे कि रुह अफजा अउर ठंडा के बोतल गरीबन खातिर खरीदब मुश्किल हवै। वहिनतान या समय गरीब मड़इन खातिर पियै वाले पानी के भी कीमत हवै। अब या बात सउहें आवत हवै कि अगर यहिनतान सरकार के लापरवाही के चलत अब गरीब मड़ई पियै वाले पानी का तरसिहैं तौ वा कसत जी पइहैं। या बात कउनौ से छिपी भी नहीं आय कि कत्तौं भी अगर कउनौ अकाल या संकट आवत हवै तौ वा गरबीन खातिर ही समस्या का कारन बनत हवै?
यहिसे जरुरी हवै कि सरकार पानी से जुड़ी समस्यन का सुलझावैं खातिर नींक अउर ठोस कदम उठावै?