न मिलई छई रूम भाड़ा

इहां पढ़इ छइ बच्चा
इहां पढ़इ छइ बच्चा

जिला सीतामढ़ी, प्रखण्ड बथनाहा, पंचायत रूपौली रूपहारा, गांव रूपौली। इहां के आंगनवाड़ी केन्द्र भाड़ा के मकान में चल रहल हई। जे लगभग तीन साल से मकान किराया बाकी हई। एक बेर रूपईया आयल रहई उहो वापस हो गेल लेकिन किराया के रूपईया न मिललई।
इहां के सेविका मनोरमा देवी, रिना कुमारी, निलम देवी सब कहलथिन कि एक त दु सौ के महिना मिलई छई। ओहु में तीन-तीन साल हो गेलई लेकिन अभि तक रूम भाड़ा के कोई पता न हई कि कहिया मिलतई? हमरा सब के घर के लोग के (जेकरा घर में केन्द्र चलई छई) बोली बात सुने के परईय। ओहु से होईय त घर से निकले के लेल कहे लगईय। जब कहियों अधिकारी के कहई  छी त कहइ  जाई छथिन कि रूपईया वापस हो गेलईह। किराया के लेल मकान मालिक के हापीडिपी बनाके दिउ। उहो हम बनवाके देली, तईयो कहां कोई सुनवाई हई।
बाल विकास परियोजना के बड़ा बाबू मदन मोहन पाण्डेय कहलथिन कि ऐक बार कुछ रूपईया आयल रहई त सब समय से नियम के आधार पर मकान के बिल अउर आवेदन के साथ न देलथिन। त रूपईया वापस हो गेलई। अब दुबारा रूपईया अतई तब सेविका सब के नियम से बिल, अवेदन, हापीडिपी लगाके देथिन तब उनका सब के मकान भाड़ा के रूपईया मिल जतई।