नियम पता होय के बाद भी नइयां ध्यान

agro6महोबा जिला मं ई समय जानवरन में गलाघोटू की बीमार बोहतई फेली हे, पे शासन प्रशासन कछु ध्यान नई देत आय। गरीब किसान खे लाने एक जानवर पविार को हिस्सा होत हे। अगर ऊ मर जात हे, तो परिवार पालब मुश्किल परत हे। जभे कि शासन खे पता हे कि बरसात के बाद हरा चारा खाएं से बीमारी होत हे, पे सरकारी कर्मचारियन के कान में जंू तक नई नंेगत आय। जभे कि 15 जून से जानवरन के टीका लगने शुरू हो जाये खा चाहि? पे 15 जून तो का 15 जुलाई तक गांवन में जानवरन के टीका नई लगे आय। अभे जैतपुर ब्लाक के पचारा गांव में लगभग पचीस छिरिया मर गई हती, जीमें लगभग एक लाख को नुकसान भओ हे ओर अभे काली पहाड़ी मे लगभग पचीस भैंस के पड़ेरू भर गए हे। जीमें लगभग दो लाख को नुकसान भओ हे। गरीब जनता खे एक भैंस एक हीरा के बराबर होत हे। सरकारी कर्मचारियन की लापरवाही से इत्तो नुकसान भओ हे तो का सरकार या सरकारी कर्मचारी ईखो मुआवजा देहे।
पशुपालन विभाग के अधिकारी (डी.बी.ओ.) सादिक अली ने जवाब में आसानी से कहो कि कर्मचारी की कमी होय से जानवरन के टीका नई लग पाए हंे। आखिर कर्मचारिन की कमी पूरी करे की जिम्मेदारी कीखी आय? सरकार की, या जनता की? आखिर सरकारी कर्मचारी एसो जवाब देके आपन पल्ला काय झाड़ देत हे? का सरकार अपने वेतन कुर्सी में बेठे ओर पल्ला झाड़े को देत हे या फिर सरकारी सुविधा गांव तक पोहचाएं को। आखिर शासन प्रशासन गरीब जनता के साथे एसो काय करत हे?